ऐसे गमले बनाए गए, जिनसे पौधो को खाद देने की जरूरत नही पड़ेगी।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर भलेसर स्थित श्री वेदमाता गायत्री गौशाला में गायो के गोबर से ऐसे गमले बनाए गए हैं। जिनसे पौधो को खाद देने की जरूरत नही पड़ेगी। हमारी संस्कृति में गाय को माता कहा जाता है। गाय एक ऐसी पालतु पशु है जिससे मिलने वाला हर एक उत्पाद हमारे लिए उपयोगी होता है। गाय के गोबर से हमने सिर्फ कंडे और खाद बनते ही देखा हैं, पर यहां इसका अलग तरह से उपयोग किया जा रहा है जिसे देखकर लोग दंग हैं। इस गौशाला में गायों के गोबर से अनूठी कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। घरेलू उत्पाद बन रहे हैं और गोबर गैस सहित खाद भी बनाई जा रही है। यह गौशाला पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।
नए-नए प्रयोग कर गोबर से कई अनूठे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जो नरवा-गरवा-घुरवा-बारी मॉडल दिया है उस पर यह गौशाला कई वर्षों से काम कर रही है।

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