जब प्रदेश के मुखिया को ही नहीं है अंधेरे रोड से ऐतबार तो क्यों फिर आम जनता को दी जाए लाइटों से भरे रोड की सौगात

अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर आंख बंद करके निकलते हैं भूपेश?

Cm-bhupesh

रायपुर / प्रदेश में रोशनी फैलाने की बात करने वाले प्रदेश के मुखिया ही जब अंधेरे रोड से गुजरने की जहमत उठा रहे हैं तो फिर आम जनता कौन से खेत की मूली है लाइट की आवश्यकता जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को महसूस नहीं हो रही है ऐसे में तो आम जनों की बात थी छोड़ दीजिए। अंधेरी रातों में सुनसान इलाकों पर जब एक मसीहा निकलता है उसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं जी हां यहां पर यह गाने की चार पंक्तियां प्रदेश के मुखिया पर बिल्कुल यथार्थ साबित होती है क्योंकि नेशनल हाईवे से रात को जब मुख्यमंत्री गुजरते हैं तब आम लोगों का रास्ता रोक पहले मंत्री जी के लिए रास्ता खाली करवाया जाता है जिसके बाद बड़े आराम से मुख्यमंत्री जी का काफिला निकल जाता है। लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है कि जिस नेशनल हाईवे से मुख्यमंत्री की सवारी निकलती है वह हाईवे अंधेरों से भरा हुआ है स्ट्रीट लाइट लगा तो दिए गए हैं पर वह भी केवल शोपीस के लिए इन स्ट्रीट लाइटों ने मानो ना जलने का जिम्मा उठा लिया है या फिर यूं कहें कि सरकार का बिल बचाने का दोनों ही सूरत में हर्जाना केवल आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है। लगता है कि भाजपा सरकार के राज में बने इन ओवरब्रिजओं का लोकार्पण भले ही कांग्रेस सरकार ने किया हो लेकिन भाजपा राज में बने इस ओवरब्रिज का मलाल जरूर कांग्रेस सरकार को है जिसके चलते वह ओवर ब्रिज में लाइटों के सुधार के लिए कुछ खास जद्दोजहद करते नजर नहीं आ रहे हैं यही कारण है कि नेशनल हाईवे 53 अंधेरे के आगोश में डूबा हुआ है।

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