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आखिर क्यो धान की नीलामी करना चाहते हैं मुख्यमंत्री भुपेश बघेल

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छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार ने किसानों की समस्या के समाधन के लिए धान खरीदी का ऐलान किया था।जिसके बाद प्रदेश में जमकर धान की खरीदी हुई।हालांकि की इस दौरान प्रदेश सरकार के पास काफी समस्याएं भी सामने आई।बारदाना की समस्या धान कर रखरखाव की समस्या।जिसके बावजूद  भी सरकार प्रदेश में धान की ख़रीदी तो हो गयी।लेकिन समस्याओं से अभी भी प्रदेश सरकार घिरी हुई है।

मौसम बना नुकसान का कारण


प्रदेश में लाखों टन धान की खरीदी हो चुका है।जिसका जमावड़ा प्रदेश के बहुत से धान केंद्रों में है।इस बीच मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने केंद्र सरकार का रुझान धान उठाव की तरफ लाने की कोशिश की।मगर संतोषजनक कोई भी हल केंद्र से नही मिला।बता दे प्रदेश में कुल धान की खरीदी 92 लाख टन हुई है।जिसमे 40 लाख टन केंद्रीय पूल में जाएगा ,25 लाख टन धान खाद्यान्न योजनाओं के लिए होगा।धान का उठाव न होने और पिछले कुछ दिनों से मौसम में हुई परिवर्तन की वजह से धान केंद्रों में रखा धान बर्बाद होने लगा है।जिससे 1 लाख टन धान के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही हैं।


नुकसान से बचने के लिए होगी धान की नीलामी:-


प्रदेश में बहुत से कारणों की वजह से धान के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।धान केंद्रों में रखे धानो की चोरी भी होने लगी है।वही चूहे, दीमक और बदलता मौसम भी धान की बर्बादी का कारण बना हुआ है।केंद्र द्वारा भी धान का उठाव नही हो रहा है।जिसके कारण भविष्य में बड़ा नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।जिसके चलते प्रदेश के मुख्यमंत्री
सीएम भूपेश बघेल ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि धान को तुरंत तालपत्री से ढंककर रखने की व्यवस्था की जाए। बेमौसम बारिश से क्षति हुई हो तो कलेक्टर तुरंत इसका आंकलन करवाएं और प्रभावितों को आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही सीएम ने कहा कि केन्द्र से चावल उठाव की अनुमति के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वहां से उठाव की अनुमति मिल जाएगी। अभी सिर्फ 24 लाख टन का ही उठाव किया जा रहा है। यदि केन्द्र सरकार इससे ज्यादा का उठाव करने से मना करती है तो धान की नीलामी का प्रस्ताव भी तैयार किया है।

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