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आखिर क्यों दुर्ग पुलिस नही कर रही कार्यवाही लोकेश पांडेय के मामले में,किसका है दबाव..?

भिलाई:- भाजयुमो जिला महामंत्री लोकेश पांडेय पर हुए जानलेवा हमले के मामले में दुर्ग पुलिस और बीएम शाह अस्पताल पर कई सवालिया निशान खड़े होने लगा है।

जानकारी के मुताबिक भाजयुमो जिला महामंत्री लोकेश पांडेय के साथ हुए मारपीट और प्राणघातक हमले में दुर्ग पुलिस द्वारा मामूली धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है

जबकि लोकेश पांडेय को गंभीर चोटें आई है।छोटी मोटी मारपीट में भी आरोपियों पर गंभीर धाराएं लगाने वाली दुर्ग पुलिस आखिर क्यों लोकेश पांडेय के इतने गंभीर चोटों को देखने के भी बावजूद धाराएं जोड़ने से पीछे क्यों हट रही है जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहे है।जिस तरह से लोकेश पांडेय चोटिल अवस्था मे है

उससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि हमले में लोकेश पांडेय की जान भी जा सकती थी परन्तु दुर्ग पुलिस मामूली धाराओ को जोड़कर मूकदर्शक बनी हुई है।

क्या था पूरा मामला

बीते 9 नवम्बर की रात को भाजयुमो वैशालीनगर मंडल अध्यक्ष शुभम सिंह में अपने 15 -20 साथियों के साथ मिलकर नेहरूनगर में लोकेश पांडेय पर प्राणघातक हमला किया था जिसमे लोकेश पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए थे।मामला लेन देन का था जिसको लेकर आपस मे भाजपाई भीड़ गए थे।

आखिर क्यों दुर्ग पुलिस कार्यवाही करने को बचती नज़र आ रही है..??

धाराएं जोड़ने में दुर्ग पुलिस के हाथ पांव फूल रहे है जिसके बाद से ही आरोपी खुलेआम घूम रहे है।अगर पुलिस की बात करे तो पुलिस की लोकेश पांडेय की मेडिकल रिपोर्ट के लिए रुकी हुई है परन्तु 2 तरह की रिपोर्ट सामने आ रही है।

पहली रिपोर्ट में लोकेश पांडेय को गंभीर अवस्था में बताया जा रहा है और उन्हें जान का खतरा बताया जा रहा है

परन्तु इसके विपरीत ही दूसरे रिपोर्ट में उन्हें नार्मल बताया जा रहा है और आनन फानन में बीएम शाह अस्पताल द्वारा उन्हें ठीक ठाक बताकर डिस्चार्ज कर दिया है परन्तु लोकेश पांडेय से बात करने पर

उन्होंने अपने आप को अस्वस्थ बताया और लगातार चोट के वजह से चक्कर आने और आंखों के सामने अंधेरा छाने की बात बताई तो ऐसे में बीएम शाह अस्पताल द्वारा कैसे मरीज को सही बताकर डिस्चार्ज कर दिया

और पहली रिपोर्ट कैसे गायब हो गयी जबकि लोकेश पांडेय के सर पर 27 टांके लगे है और उन्हें 2 दिनों तक आई सी यु में रखा गया था।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले को लेकर सत्तापक्ष का एक क्षेत्रीय विधायक लगातार अस्पताल प्रबंधन और पुलिस प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहा है जिससे कही न कही आरोपियों को इनका संरक्षण मिलता नज़र आ रहा है।

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