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आलाकमान ने भूपेश सरकार को दी पत्रकारों पर दबाव बनाने की छूट चाटुकार बनो या तो पत्रकारिता छोड़ो की नीति

सावधान! छत्तीसगढ़ में पत्रकारों का सच दिखाना मना है, सभी पत्रकारों पर होगी एफआईआर जाएंगे जेल

रायपुर। झूठ चाहे कितना भी मजबूत क्यों ना हो सच को छुपा नहीं सकता और वर्तमान में प्रदेश का सच यह है कि यहां जब से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सत्ता में आए हैं तब से पत्रकारों को झूठे आरोपों में फंसा कर जेल भरो आंदोलन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।भारत के संविधान में पत्रकारों को चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है। चौथा स्तंभ जिसका पहला कर्तव्य है बिना बिके बिना विज्ञापन की लालसा में आये सच उजागर करें भले ही गुनाह करने वाला कितना ही बड़ा नेता क्यों ना हो अपने कलम की ताकत पर कभी भी उसे हावी ना होने दें।

लेकिन आज आलम बेहद विपरीत है। क्योंकि यह कहने में भी दो राय नहीं कि प्रदेश में कुछ नामी पत्रकार अखबार व चैनल ऐसे हैं जो मुखिया के दबाव में आकर और विज्ञापन की लालसा में अपना कर्तव्य निभाना भूल चुके है। अगर कोई छोटे संस्थान का पत्रकार सरकार के सामने सच उजागर करने की हिम्मत दिखाकर सच को सामने लाता भी है तो या तो उस पर वसूली करने का आरोप लगा दिया जाता है या फिर उल्टा उन्हें झूठे केस में फंसा कर जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है। और हाल ही में अभी ऐसा ही एक मामला जशपुर जिले में देखने को मिला।

जिला कांग्रेस कमेटी जशपुर के अध्यक्ष मनोज सागर यादव का दबदबा इस हद तक सार्वजनिक है जिनकी मौजूदगी में कांग्रेस नेता के बदसलूकी का वीडियो बनाकर एक पत्रकार गुनहगार बन गया शर्म की बात यह है कि उनके इस दादागिरी पर खुद को बड़े संस्थान के पत्रकार कहने वाले पत्रकारों की बोलती भी बंद है। मनोज सागर यादव की मौजूदगी में पूर्व जिला अध्यक्ष के साथ मंच पर बदसलूकी की गई। धक्कामुक्की की गई। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मीडिया की मौजूदगी में हुई। मीडिया ने खबर बनाई, दिखाई। अपना काम किया।

अब खबर लिखना और दिखाना यादव साहब को नागवार गुजरा। यादव साहब ने सभी मीडिया समूहों पर एफआईआर दर्ज करने का पत्र थाना प्रभारी कुनकुरी को लिखा। इस पत्र को लेकर खुद संसदीय सचिव यूडी मिंज थाने पहुंचे थे। उन्होंने टीआई साहब को साफ शब्दों में कह भी दिया है कि एफआईआर दर्ज हो जाना चाहिए। नई तो…


अब यह नहीं तो के आगे की धमकी क्या हो सकती है इस बात का तो अंदाजा नहीं लगाया जा सकता लेकिन प्रदेश के सभी नेता और कुछ खुद को बड़े सन्स्थान के पत्रकार कहने वाले क्या इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें यह भी नहीं समझ आ रहा कि भरे मंच पर बदसलूकी एक कांग्रेस नेता ने की और जिसे सिर्फ मीडिया ने दिखाया तो किस बिनाह पर उस पर f.i.r. करने की मांग इन महाशय द्वारा की गई।

लेकिन उनसे सवाल पूछने वाला कोई नहीं क्योंकि या तो उनके द्वारा भारी भरकम रकम विज्ञापन के रूप में बड़े संस्थानों तक पहुंचा दी गई होगी या तो फिर उन्हें भी अपने कलम पर भरोसा कम और रसूखदारों का डर ज्यादा है।

यहां तो खुद को बड़े संस्थान का पत्रकार कहने वाले कुछ लोग खुद बड़े-बड़े रसूखदार और अधिकारियों की जी हुजूरी करते फिरते है अरुण के सामने नतमस्तक रहते हैं क्योंकि इन्हें बड़े-बड़े मंचों में वाहवाही पाने की लालसा रहती है। ऐसे ही पत्रकारों के वजह से सच दिखाने वाले पत्रकारों को चाहे वह छोटे की संस्था का क्यों ना हो उन्हें आसानी से अपना टारगेट बना लिया जाता है।

ऐसे में अब थाना प्रभारी को जिले के सभी पत्रकारों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर लेना चाहिए और सबको गिरफ्तार भी करना चाहिए। आखिर खबरों से सरकार की नाक कटी है। और नाक कटने पर गिरफ्तारी तो बनती ही है।

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