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PC SINGH-इस धर्मगुरु को क्या नाम दें: स्पा सेंटर में SYNOD की बैठक, मजबूरी या साजिश

कहते हैं जुल्म करने वाले से ज्यादा गुनहगार जुल्म सहने वाला होता है लेकिन इसके बावजूद भी जब समाज के लोगों को गुलामी में रहने की आदत हो गई है तो क्या ही किया जा सकता हैं। लेकिन इसका फायदा बखूबी पीसी सिंह उठा रहे हैं जिनका मॉडरेटर का कार्यकाल तो खत्म हो चुका है लेकिन इसके बावजूद भी यह मॉडरेटर पद को छोड़ना नहीं चाहते। जाहिर सी बात है छोड़ें भी क्यों? क्योंकि इन्हें तो पता है कि इनके समाज के लोगों के पास इतनी हिम्मत ही नहीं है

कि वह उनके खिलाफ आवाज उठा सके और शायद यही कारण भी है कि उनका कार्यकाल खत्म होने के बावजूद भी वह मॉडरेटर को मिलने वाले अधिकारों को भुनाकर राजस्थान और मुंबई डायसिस के बिशप पर गलत कार्रवाई कर रहे हैं। इसका कारण भी सिर्फ इतना है कि पीसी सिंह को डर था कि कहीं यह भी इनके खिलाफ न चले जाएं।

स्वार्थ इतना कि काम निकलने के बाद पीसी सिंह अपने करीबियों से भी झाड़ लेते हैं पल्ला

यह बात तो सबको पता ही है कि सुरेश जैकब को एक समय में पीसी सिंह का दायां हाथ माना जाता था। सुरेश जैकब पीसी सिंह के हर कृत्यों में बखूबी उनके साथ खड़े रहते थे। लेकिन, जैसे ही पीसी सिंह का सुरेश जैकब से स्वार्थ खत्म हुआ उसके बाद उन्होंने उन्हें भी दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया और दूसरी ओर पिंटू तिवारी को अपना गुरु बताते फिरते हैं।

हद तो तब हो गई जब पीसी सिंह ने भरे मंच से पिंटू तिवारी के लिए तारीफों के पुल बांध दिए लेकिन सुरेश जैकब जो हर समय पीसी सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहता था उनका कहीं पर कोई भी ज़िक्र नहीं। पीसी सिंह को अपने साथियों के ही आत्म सम्मान की कोई कदर नहीं और जो लोग उनके गलत कृतियों में साथ देते हैं उन्हें भी अब तक ठोकर लगने के बाद भी समझ नहीं आ रहा है कि पीसी सिंह केवल उन्हें मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हैं उसके बाद उनका वजूद मिट्टी के बराबर भी नहीं रहता।

चर्चेस के पैसों पर करते हैं अय्याशी

डायसिस के अधीनस्थ जितने भी चर्चेस है वहां से बकायदा डायसिसों में दान की राशि पहुंचती है। बावजूद इसके डायसिसों के पास पादरियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है लेकिन, सिनोड में मॉडरेटर पद पर बैठे धर्मगुरु के पद को अपनी आसामी समझने वाले पीसी सिंह के पास बराबर पैसा पहुंचता है और पीसी सिंह इन पैसों का इस्तेमाल खुद के ऐशो आराम में करते हैं।


एक धर्मगुरु का कार्य होता है सब सुख त्याग कर धर्म प्रसार कर लोगों को धर्म के रास्ते में चलने के लिए प्रेरित करना लेकिन मसीह समाज के लिए दुर्भाग्य की बात है कि पीसी सिंह पादरियों के हक पर डाका डालते हुए उनके पैसों का उपयोग प्राइवेट चार्टर्ड प्लेन में उड़ान भरने और अपने साथ गनमैन बाउंसर रखने के लिए करते हैं। भले ही वेतन के अभाव में तंग आकर कुछ पादरियों ने अपनी जान ही क्यों न गवा दी हो पर इन धर्म के ठेकेदारों को इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

                         एफआईआर में शतक पार फिर भी धर्मगुरु के आड़ में नहीं छोड़ रहे कुकृत्य

मिशन की जमीनों का बंदरबांट करने और पूरे देश भर में अपने अवैध कृतियों के चलते सुर्खियों में रहे पीसी सिंह के ऊपर अब तक 100 से ज्यादा f.i.r. हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी इनके ऊपर कोई कार्यवाई नहीं की गई क्योंकि शायद धर्मगुरु होने का फायदा इन्हें मिला है। कहीं ना कहीं पीसी सिंह के मॉडरेटर पद को ना छोड़ने का यह भी एक कारण हो सकता है क्योंकि उन्हें पता है कि उन्होंने किस तरह से बिशपों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाया है उनके हकों पर डाका डाला है और तो और पूरे देश भर में गलत, असंवैधानिक कृतियों में लिप्त रहे हैं।

तो अगर उन्होंने मॉडरेटर पद का त्याग किया तो हो सकता है कि उनके ऊपर कार्रवाई की गाज गिरने की भी संभावना हो। यही कारण है कि एक धर्मगुरु होने के बावजूद किसी नेता मंत्री की तरह उनके आजू-बाजू गनमैन और बाउंसर हमेशा उनके हिफाजत के लिए खड़े रहते हैं जिसे यह भी उजागर होता है कि पिसी सिंह को किसी न किसी का डर तो जरूर है। बता दें कि कुछ समय पहले दाऊद के कुछ करीबियों से भी इनके संबंध होने की बात सामने आई थी। अब यह तो वही जाने की धर्म की आड़ में कौन से अधर्म का काम कर रहे हैं और क्या उन्हें ईश्वर से डर नहीं?

बर्जेस स्कूल में बच्चों के लिए लाइट नहीं, लेकिन पीसी सिंह के लिए पैसों की तरह बहा दिया पानी

अगर वाकई समाज का कोई सम्मानित व्यक्ति अपने समाज के प्रति सोचता है तो वह अपने से पहले लोगों की भलाई के लिए सोचता है। हाल ही में पीसी सिंह जब छत्तीसगढ़ दौरे पर थे तो बिलासपुर के बर्जेस स्कूल में उनके आव भगत लिए पानी की तरह पैसे बहा दिए गए यह वही स्कूल है जहां बिजली बिल पटाने के भी पैसे नहीं है जिसके चलते स्कूल की बिजली काट दी गयी है। इतना ही नही स्कूल में बच्चों के लिए जो लैब बनवाया गया है वह मात्र दिखावे भर के लिए ही है

News paper file
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हालांकि लैब के लिए पैसे लिए जरूर गए थे लेकिन जब निरीक्षक ने 12 लाख रुपये का हिसाब मांगा तो स्कूल प्रबन्धक जवाब नही दे सके। बावजूद इसके पीसी सिंह के आवभगत में कोई कमी नहीं की गई। अगर वाकई पीसी सिंह एक समाजसेवी होते तो सबसे पहले बर्जेस स्कूल के संचालक को फटकार लगाते और बच्चों के लिए अच्छी सुविधा मुहैया कराने की बात कहते। लेकिन उन्हें इन से मतलब नहीं उन्हें तो फर्क से पड़ता है कि कहीं उनके स्वागत में कोई कमी ना रह जाए।

मॉर्डन धर्मगुरु गोवा के स्पा में करते है बैठक

लोगों को सच झूठ का पाठ पढ़ाने वाले धर्मगुरु को क्या यह शोभा देता है कि वह किसी स्पा सेंटर में जाकर बैठक करें। लेकिन पीसी सिंह एक ऐसे धर्मगुरु हैं जो गोवा के स्पा सेंटर में जाकर असंवैधानिक बैठक कर रहे है। अब इस धर्मगुरु को क्या नाम दें यह तो नही पता लेकिन इनका यह कारनामा धर्मगुरु की पदवी को दूषित जरूर कर रहा है।

टारगेट में बिशप,अब ये होंगे पीसी सिंह के शिकार

पीसी सिंह किस तरह अपने करीबियों से काम निकलने के बाद उन्हें अलग कर देते हैं यह तो सभी को मालूम ही है। वहीं अब मिल रही जानकारी के मुताबिक पीसी सिंह का एक और सच निकल कर सामने आ रहा है जिसमें यहां अंदाजा लगाया जा रहा है कि बिशपों को उनके पद से हटाकर पीसी सिंह अब उन पादरियों की नियुक्ति बिशप के पद पर करने जा रहे हैं जो कि उनके करीबी है और उनकी जी हुजूरी करते हैं।

ऐसे में अभी भी समय और सबक है सभी पादरियों और बिशपों के लिए जो अंध भक्ति में लीन होकर पीसी सिंह को अपना मसीहा समझते हैं और वही मसीहा उनके पीठ पर छुरा घोपने का काम कर रहे हैं उनके इस गलत कार्यों में आवाज उठाकर खुद के आत्मसम्मान का बचाव करने का।

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