National

वित्त मंत्री सीतारमन करेगी आज बजट पेश कोरोना संक्रमण से हुए आर्थिक नुकसान को पूरी करने की जताई जा रही उम्मीदे

News Ads

आज वित्त मंत्री सीतारमन द्वारा बजट पेश किया जाएगा।सीतारमण के इस बजट से जनता को बहुत सी उम्मीदे है। आम जनता यह आस लागए बैठी है कि निर्मला सीतारमण अपने पिटारे से क्या क्या देंगीं।क्योकि 2020 देश के लिए अधिक नुकसानदायी रहा।2020 मे देश को वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सबसे ज्यादा आर्थिक और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कोरोना वायरस के कारण देश की बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इस बजट में कई महत्वपूर्ण ऐलान हो सकते हैं।बजट को लेकर उम्मीद जताई जा रही है। कि सेवा क्षेत्र, बुनियादी ढांचे और रक्षा पर अधिक खर्च के जरिए आर्थिक सुधार को आगे बढ़ाने पर और अधिक ध्यान दिया जा सकता है।

एक अंतरिम बजट को जोड़कर देखा जाए तो मोदी सरकार का यह नौवां बजट है।यह बजट इसलिए महत्वपूर्ण है।क्योंकि इस वक्त देश कोविड-19 संकट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। तो व्यापक रूप से रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास पर खर्च को बढ़ाने, विकास योजनाओं के लिए उदार आवंटन की उम्मीद जताई जा रही है। बजट में औसत करदाताओं के हाथों में अधिक पैसा डालने और विदेशी कर को आकर्षित करने के लिए नियमों को आसान किए जाने की आशा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2019 में अपना पहला बजट पेश किया था।उन्होंने चमड़े के पारंपरिक ब्रीफकेस को बदल दिया था और बदले में लाल कपड़े में लिपटे ‘बही-खाते’ के रूप में बजट दस्तावेजों को पेश किया था। वहीं उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष का बजट इस तरीके का होगा,जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह बजट कोरोना महामारी की वजह से तबाह हुई अर्थव्यवस्था को वापस जोड़ने की शुरुआत होगा. उनका यह भी कहना है कि इस बजट को महज बही-खाते या लेखा-जोखा या पुरानी योजनाओं को नए कलेवर में पेश करने से अलग हटकर होना चाहिए।वहीं 14.9 फीसदी लोगों ने कहा कि वो इस बारे में कुछ कह नहीं सकते हैं।91.5 फीसदी लोगों ने कहा कि हां सरकार को इन उत्पादों को और सस्ता बनाना चाहिए वहीं 4.4 फीसदी लोगों का जवाब ना में था।

More Article from World

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Around The World
Back to top button
Contact Us