Raipur

क्या असम व केरल में ,कांग्रेस की चुनावी स्थिति के लिए, छ०ग० के क्रिश्चियन समुदाय की पीड़ा भी जिम्मेदार है!

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आज का अहम सवाल…

मनिक मेहता की कलम से :- राज्य में क्रिश्चियन समुदाय पर हुए हमले, तथा, तद्पश्चात् आवाज़ उठाने पर, छ.ग. क्रिश्चियन फोरम के पदाधिकारियों को दीं गयी पुलिसिया धमकयों को भी, इससे जोड़कर देखा जा रहा है।कांग्रेस को बारीकी से आंकलन तो करना ही पड़ेगा इस तथ्य का भी…क्योंकि, जिस दल की वर्तमान मुखिया भी उसी समुदाय से आती हों, उससे तो ऐसे निष्पक्ष आंकलन की अपेक्षा की ही जा सकती है…बाकी, बंगाल चुनाव नतीजे भी दर्शा रहे हैं कि, भाजपा ने आखिरकार 3 से लगभग सैकड़े का असंभव सफर, संभव कर दिखाया है (वर्तमान बड़त के आधार पर), तथा, वहीं कांग्रेस का परफार्मेंस पुन: निराशाजनक दिख रहा है। वैसे, संभवत: दीदी का प्लास्टर ही, बंगाल चुनाव का सबसे हीरो प्रतीत हो रहा है…पुदुच्चेरी का भी कांग्रेसी मुट्ठी से फिसलता दिखना, इस दल के वेंटीलेटर पर चढ़ने की स्थिति का स्पष्ट सूचक है। दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के परिणाम लगभग अपेक्षित रहे हैं।अलबत्ता ये भी एक तथ्य है कि, इन चुनावों में जीत जिस किसी भी दल की हो, (करोना से) हार तो समूचे देश की जनता की ही हुई है। देखो अब, मान० उच्चतम न्यायालय, स्वतंत्र चुनाव आयोग की हालिया याचिका पर, क्या-क्या मौखिक टिप्पणियां करता है तथा कैसा लिखित फैसला पारित, क्योंकि, आखिरकार हमारे देश में, न्यायालयों के कड़े observations को observe करने की आदत कम, एवं, लिखित फैसलों के beneficial interpretations निकलने की प्रथा ज़्यादा है…

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