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सरकार द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नहीं हुआ बहुत सारे शिक्षकों का चयन, वादे से मुकरे सीएम

रायपुर। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सहायक शिक्षकों को नियमित करने का वादा किया था लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने इस वादे पर पूर्ण रुप से खरे नहीं उतर पाए जिसके बाद अब शिक्षकों में रोष व्याप्त है इसी के मद्देनजर संविदा में कार्यरत शिक्षकों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ मोर्चा खोला है 2019 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षक भर्ती आयोजित किया गया था लेकिन इसमें भी बहुत सारे शिक्षकों का चयन नहीं हो पाया था।

छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा दिनांक 09.03.2019 को “14580” शिक्षकों की भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें व्याख्याता के 3177 पद,हिन्दी माध्यम, अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों के लिए 5897 पद और सहायक शिक्षक (हिन्दी माध्यम विज्ञान, प्रयोगशाला और अंग्रेजी माध्यम) के 5506 पद शामिल थे जिसके लिए जुलाई-अगस्त 2019 को परीक्षा आयोजित की गई थी तथा नवंबर 2019 तक सभी वर्गों के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए गए थे।

जिसमें व्याख्याता के कुछ पदों को छोड़ कर बाकी पदों पर नियुक्ति सरकार द्वारा मार्च 2021 में की गई है तथा शेष शिक्षक व सहायक शिक्षक में चयनित अभ्यर्थी आज तक 2 वर्ष 2 माह गुजर जाने के बाद भी पदस्थापना से वंचित हैं।शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के अभ्यर्थियों को पहली दस्तावेज सत्यापन रद्द कर दूसरी दस्तावेज सत्यापन उपरांत प्रदान किए गए पात्रता-पत्र में यह उल्लेख किया गया कि “वर्तमान में कोरोना महामारी को दृष्टिगत रखते हुए शालाएँ बंद है,

शाला खुलने पर पद रिक्तता के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा”। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ हमारी नियुक्ति रोक दी गयी ये कह कर कि स्कूल बंद हैं तो दूसरी तरफ संविदा भर्ती के आदेश जारी किए गए हैं, स्कूल बंद होने का हवाला देकर हमें बेरोजगारी दी जा रही है जबकि स्कूल के सभी कार्य ऑनलाइन मोड में जारी हैं जैसे कि पढई तुंहर द्वार और पढ़ई तुंहर द्वार 2.0 भी इस सत्र लायी जा रही है. सरकार चाहे तो कई साल तक ऑनलाइन पढ़ाई जारी रख सकती है

और स्कूल न खुलने का बहाना कर हमें नियुक्ति से वंचित रख सकती है, आखिर कब तक हमें बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ेगा? हम पढई तुंहर द्वार का हिस्सा बन के राज्य के ग्रामीण और पिछड़े बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, आपदा प्रबंधन के तहत हम कोरोना ड्यूटी करने को भी तैयार हैं।

समय समय पर अभ्यर्थी द्वारा राज्य सरकार से नियुक्ति के संदर्भ मे बार बार अथक प्रयास किया गया, फिर भी यह नियुक्ति से वंचित है, जिससे शिक्षकों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

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