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बर्ड फ्लू से नही 5G नेटवर्क के रेडिएशन से मर रही पक्षियां

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मानव जीवन स्वार्थ से परिपूर्ण है।इनके लिए एक सुविधाए क्या कम पड़ जाए दुनिया भर में इनके जरूरतों की चीखें गूँजने लगती है।और मानव की जरूरतों और सुविधाओं को पूरा करने के लिए न जाने कितने असँख्य विनाशकारी प्रयोग किये जाते है।अपने स्वार्थ में चूर मानव प्रकृति और प्रकृति में रह रहे अन्य जीवों के लिये विचार तक नहीं करता।कि उनके सुविधाओं के लिए उठाया गया कदम जीव जंतु और प्रकृति को कौन सा दिन दिखाएगा।

बता दें देश मे पक्षियों के उड़ते उड़ते गिर जाने की खबर ने लोगो के अंदर दहशत बना रखा है,कि कही बर्ड फ्लू न हो जाये।दूसरी पहलू पर लोगो का ध्यान ही नही जा रहा कि पक्षीयों के मरने के पीछे दूसरा कारण भी तो हो सकता है।जिसका जिम्मेदार पूरा मानव जीवन हो सकता है।हमारे मनोरंजन में उपयोगी मोबाईल फोन का नेटवर्क पक्षियों के लिए विनाशकारी है।नेटवर्क से निकलने वाले रेडिएशन पक्षियों के लिए घातक होता है।

बर्ड फ्लू की नही हुई है पुष्टि


उपसंचालक पशु चिकित्सक डॉ. सीके पांडेय का कहना है कि बर्ड फ्लू का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में आशंका है कि कहीं टकराने के कारण उसे ज्यादा चोट लगी हो और वह फड़फड़ाते हुए नीचे गिर पड़ी हो। वहीं उसकी मौत हो गई।

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जानबूझकर नासमझी दिखा रहे लोग


पक्षियों के साथ हो रहे अत्याचार को कितनी आसानी से लोग अनदेखा कर रहे हैं।मानव इतने महत्वकांक्षी हो चुके है,की उनके चहचाहति प्रकृति नही बल्कि सुपरस्टार नेटवर्क चाहिए।और इनके मांगों को पूरी करने वाले बड़े-बड़े बिजनेसमैन नेटवर्क की तीव्रगति को बढ़ाते जा रहे हैं।जिसके कारण पक्षियों की तादात में काफी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

चौका देने वाले तथ्य


पिछले कुछ दशकों में पक्षियों के आंकड़े बेहद कम हो चुके हैं।नेटवर्क से निकलने वाले हानिकारक तरंगों से पक्षियों की विविधता को विलुप्त कर चुका है।पहले हर आंगन में पक्षियों की चहचाहट सुनने मिलती थी।किंतु अब पक्षियां वन और ग्रामीण क्षेत्र में ही देखने मिलती है।

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