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कांग्रेस में फिर हलचल, सीएम को हाईकमान का बुलावा

दिल्ली। एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जनता को साधने में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी ओर अपने अंतः कलह को सुलझाने में बार-बार नाकाम साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ में पहले ही ढाई ढाई साल का मुद्दा गरमाया हुआ है तो वही पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने के बाद भी कलश शांत नहीं हुई है।

इसी बीच एक बार फिर से पंजाब में कांग्रेस के बीच बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। जिसके चलते पहले विधायकों को दिल्ली बुलाया गया और अब अचानक से राहुल गांधी ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को भी दिल्ली बुलवाया है। जिस समय राहुल गांधी का बुलावा चरणजीत सिंह चन्नी को आया उस वक्त चन्नी रोपड़ के किसी कार्यक्रम में गए थे। जहां से वो तुरंत ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस हलचल को कैप्टन अमरिंदर सिंह के सियासी दांव के साथ अरुसा आलम के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

अरुसा विवाद को लेकर कांग्रेस हाईकमान के बेहद नाराज होने की जानकारी मिल रही है खासकर, इस विवाद में कैप्टन ने सोनिया गांधी को घसीट लिया। जिसके बाद दिल्ली में हलचल बढ़ गई। इसी वजह से पहले डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा को दिल्ली तलब किया गया था। माना जा रहा है कि उन्हें इस मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान की खरी बातें सुननी पड़ी। रंधावा ने ही अरुसा के ISI कनेक्शन की जांच की बात कहकर विवाद शुरू किया था।

वहीं इस पूरे प्रकरण की नींव में नवजोत सिद्धू भी बताए जा रहे हैं। पंजाब में चुनाव को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू से मीटिंग की थी। जिसमें सिद्धू ने भी अरुसा विवाद को लेकर एतराज जताया। इसके अलावा डीजीपी और एडवोकेट जनरल की नियुक्ति पर सवाल उठाए। सिद्धू ने हाईकमान को बताया कि पंजाब में सरकार हाईकमान के 18 सूत्रीय एजेंडे पर काम नहीं कर रही। माना जा रहा है कि इसके बाद ही संगठन की शिकायत पर सरकार को दिल्ली बुलाया गया।

नवजोत सिद्धू ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र बढ़ाने और कृषि कानूनों को लेकर 8 नवंबर को बुलाए पंजाब विधानसभा सेशन की तारीफ की है। हालांकि सिद्धू ने फिर चन्नी सरकार के लिए सवाल छोड़ दिया है। सिद्धू ने इसमें गलत बिजली समझौतों को रद्द करने की भी मांग उठा दी है। जिसके जरिए घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकेगी।

कांग्रेस की इस तरह से बार-बार हो रही किरकिरी से जनता के बीच भी अब कांग्रेस पार्टी को लेकर कहीं ना कहीं विश्वास घटता जा रहा है। अगर कांग्रेस जल्दी से अपने कलह का रायता नहीं समेटती है तो फिर आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें करारा झटका लग सकता है।

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