Raipur

मनमानी फीस वसूल कर पालकों के जेब में डाला डाका, जब डीईओ ने मान्यता की रद्द तब स्कूल संचालकों के पैरों तले खिसकी जमीन

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रायपुर। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी अपने चरम सीमा पर है लोगों की मजबूरियां और बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की ललक का फायदा उठाते हुए स्कूल संचालकों ने शिक्षा बांटने का नहीं बल्कि शिक्षा व्यापार का एक गोरखधंधा इन दिनों शुरू किया हुआ है, जिसमें हर चीज की दुगनी और मोटी रकम वसूल की जाती है। शिक्षा अस्पताल यह व्यापारिक संस्था नहीं लेकिन सबसे ज्यादा व्यापार इन्हीं जगहों पर देखने को मिलता है। शिक्षा जिसमें सबका अधिकार है जो गैर व्यापारिक संस्था है वही आज सबसे ज्यादा पैसा वसूल कर व्यापारी क्षेत्र में सबसे आगे है। लेकिन मजबूरन मां बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए हर वह काम कर गुजरते हैं जो शायद उनके बस की भी नहीं होती और भले ही अपनी संपत्ति बेच देते हैं लेकिन बच्चे को अच्छी शिक्षा देने की कवायद कभी नहीं छोड़ते, उनकी इन्हीं मंशा को भापकर स्कूल संचालक बखूबी इसका फायदा उठाते हैं। लेकिन कहा जाता है कि हर बुराई का अंत जरूर होता है कुछ इसी तरह डीईओ ने 240 स्कूलों की मान्यता रद्द कर सभी प्राइवेट स्कूलों के संचालकों पर गाज गिराकर उनके इस को कृतियों पर रोक लगाया है। जिस तरह से पालकों से मनमाना शुल्क वसूल कर अपने जेबों को गर्म करने का काम स्कूल संचालक करते थे अब स्कूल में ताला लगने की नौबत आते ही तिलमिलाने लगे हैं। बता दे फीस विनियमन अधिनियम 2020 का उल्लंघन करने वाले जिले के 240 स्कूलों की मान्यता जिला शिक्षा अधिकारी जी आर चंद्राकर ने रद्द कर दी है।

वही डीईओ के इस कार्यवाही पर जिले के स्कूल संचालकों ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के नेतृत्व में डीईओ कार्यालय का घेराव किया और ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही को गलत ठहराया, जिले के स्कूल संचालकों का कहना था कि विभागीय अधिकारी पैनिक क्रिएट कर रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के इस आरोप को सिरे से नकारते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी मैं नहीं चलने दूंगा। स्कूली शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निर्देश जारी होने के बाद स्कूल प्रबंधकों ने फीस समिति का गठन नहीं किया और पालकों से मनमाना शुल्क वसूलते गए। वहीं छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन और निजी स्कूलों के संचालकों की मांग पर डीईओ ने 3 दिन का समय स्कूल संचालकों को दिया है इस दरमियान जिन स्कूलों की फीस समिति की जानकारी आ जाएगी उन स्कूलों पर मान्यता निरस्त होने की गाज नहीं गिरेगी। लेकिन इन 3 दिनों में जिस प्राइवेट स्कूल फीस समिति की जानकारी नहीं आएगी उन स्कूलों पर ताला लगने से कोई नहीं रोक सकता। डीईओ के इस कदम से प्राइवेट संचालकों के मन में सुगबुगाहट और एक डर का माहौल बना हुआ है।

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