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Raipur गरीबों के हक में डाका डाल रहे प्रेस क्लब के पदाधिकारी,घर आबंटन में किया बड़ा झोल पढ़ें बड़ी खबर

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रायपुर। आज के समय में हर व्यक्ति अपने दायित्व के विपरीत कार्य कर रहा है न्यायपालिका अन्याय का साथ दे रही है,पुलिस अपराध करने वालों के साथ कुछ पैसों की लालसा में हाथ मिला रही है, नेता जनता के हित में बात करके अपना घर भर रहे हैं। तो ऐसे में भला लोगों को सच से अवगत कराने की बात करने वाले, लोगों को उनका हक दिलाने, उनके सम्मान में आवाज उठाने की बात करने वाले पत्रकार भला कैसे पीछे रह सकते हैं वह भी ऐसे पत्रकार जो केवल बड़े नामी मीडिया जगत के लोगों को ही पत्रकार मानती है

और बाकी पत्रकारो को कौड़ियों के बराबर समझ कर,उनके साथ भेदभाव करती है। आज कुछ ऐसे ही मामले से हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं जिसको सुनकर शायद आपके मन से पत्रकारों पर से भी विश्वास उठ जाएगा। राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब में डंका बजता है जो स्वयं तो किसी बड़े न्यूज चैनल में या किसी बड़े न्यूज संस्था में पदस्थ नहीं है लेकिन वेब पोर्टलों के पत्रकारों को नीचा दिखाने उन पर धाक जमाने या उनको नसीहत देने से पीछे नहीं हटते। इतना ही नही अध्यक्ष पद का रूआब इस तरह झाड़ते हैं जैसे की पूरी की पूरी सरकार इनके जेब में हो। और ऐसा शायद है

भी यही कारण है कि बीएसयूपी में पत्रकारों को घर आवंटित करने वाले मामले में प्रेस क्लब के अध्यक्ष,पदाधिकारी और नगर निगम की मिलीभगत से पत्रकारों और गरीबों के हक में डाका डालते हुए अपने परिवार वालों को और जिनका पत्रकारिता से दूर दूर तक का नाता नहीं है उनके नाम से पत्रकार होने का हवाला देते हुए घर आवंटित करवाया गया है। जिसका पूरा कच्चा चिट्ठा आईडीपी 24 न्यूज़ के हाथों लगा।

कई लोगों के नाम तो ऐसे हैं जिन्हें पत्रकारिता का मतलब ही नहीं पता तब उनका पत्रकार होना तो दूर की बात है, इसके बावजूद भी पत्रकारों को घर आवंटित हुए लिस्ट में इन लोगों के नाम शामिल है। लेकिन आखिर जब यह पत्रकार नहीं तो इन्हें घर पत्रकार के नाम से आवंटित कैसे हुआ? ऐसे करने के पीछे प्रेस क्लब के माननीय अध्यक्ष और पदाधिकारियों की क्या मंशा थी? एक व्यक्ति के पूरे परिवार वालों के नाम से अलग-अलग घर आवंटित करने पर आखिर क्यों नगर निगम ने कोई सवाल खड़े नहीं किए?

क्यों इस बात की तफ्तीश नहीं की गई कि क्या वाकई जिन पत्रकारों के नाम से घर आबंटित किया गया है वह वाकई पत्रकार हैं या नहीं? यह सारे सवाल सिर्फ और सिर्फ केवल एक बात की ओर इशारा करते हैं और वह है घपलेबाजी जो नगर निगम और अपने आप को सम्माननीय पत्रकार कहने वाले प्रेस क्लब के ग्रुप मेंबरों द्वारा बिना किसी डर के की गई है।

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