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रमन भूपेश की गहरी यारी,पद पर अभी भी बरकरार है लेखाधिकारी

नितिन लॉरेंस 7828133333/ चोर चोर मौसेरे भाई यह कहावत आप सभी ने जरूर सुनी होगी और इसका अर्थ भी आप सभी को पता ही होगा इस कहावत से जुड़ी कुछ ऐसी ही खबर लेकर में उपस्थित हूं आपके समक्ष लेकिन इससे पहले आपको बता दें कि ऐसा बोलने के पीछे का कारण क्या है और कौन चोर है और कौन मौसेरा भाई। छत्तीसगढ़ की जनता के आंखों में पट्टी बांधने और उनका हक छीनने का काम पूर्व के भाजपा शासनकाल से चलता रहा है जो आज कांग्रेस के राज में भी जारी है भले ही जनता के सामने रमन सिंह और

भूपेश बघेल एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन नजर आते हैं लेकिन पर्दे के पीछे की वास्तविकता कुछ और ही है चलिए आप सभी का ज्यादा वक्त ना लेते हुए आते हैं सीधे खबर पर सन 2001 में छत्तीसगढ़ संवाद ने लेखा अधिकारी पद हेतु निविदा आमंत्रित किया था जिसमें संविदा के लिए योग्यता अनुसार व्यक्ति की भर्ती होनी थी योग्यता के लिए जो अहर्ता जारी की गई थी उसमें विज्ञापन के क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव मांगा गया था लेकिन 2001 से लेकर वर्तमान तिथि तक जो लेखाधिकारी की पद में बैठे हुए हैं उन्होंने अपने योग्यताओं का जो सर्टिफिकेट दिया है उसमें कहीं पर विज्ञापन के क्षेत्र में 3

वर्ष का अनुभव का उल्लेख नहीं है बल्कि लेखा अधिकारी ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं वह चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी के अनुभव का है अब यहां पर तो यही बात हो गई कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना हम बात कर रहे हैं लेखाधिकारी शरद पात्रा की जिन्होंने संवाद द्वारा दिए गए अहर्ता के विपरीत सर्टिफिकेट जमा किया है और अब तक वह इस कुर्सी पर भी विराजमान है इस बात का खुलासा तब हुआ जब आशीष देव सोनी ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी बता दें कि 2003 में जब रमन सरकार बनी तब रमन सिंह शरद पात्रा पर इतना मेहरबान हो गए कि उन्हें संविदा से हटाकर परमानेंट कर दिया और अब भूपेश सरकार के राज में भी बकायदा शरद पात्रा की कुर्सी सलामत है इस विषय में इंटक के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष देव सोनी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लिखित शिकायत भी की है बावजूद इसके भी अभी तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मामले से कन्नी काटे बैठे हैं अब यहां पर यह बात समझ से परे है कि रमन सरकार ने जिस लेखा अधिकारी शरद पवार पर मेहरबानी दिखाकर उन्हें परमानेंट नियुक्त किया है उसके शिकायत मिलने के बाद भी भूपेश सरकार आखिर क्यों इस पर कोई एक्शन नहीं ले रहे है इससे तो साफ तौर पर यही स्पष्ट हो रहा है कि भले सामने में रमन भूपेश के बीच कितनी भी तकरार क्यों ना हो राजनीति के पीछे आपसी सांठगांठ इनकी बहुत मजबूत है अब तो आप जान ही गए होंगे कि हमने चोर चोर मौसेरे भाई वाली कहावत क्यों कही थी बाहर हाल इस विषय पर हमने लेखाधिकारी शरद पात्रा से फोन पर चर्चा की तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि विज्ञापन के क्षेत्र में मैंने काम किया है लेकिन दस्तावेज होने की बात कहते हुए भी दस्तावेज दिखा नहीं पाए अब यह तो वही बात हो गई सारी दस्तावेज हमारे पास थी लेकिन हमारा देने का ही मन नहीं था शायद यही कारण है कि विज्ञापन के क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव जो मांगा गया था संवाद द्वारा उसका सर्टिफिकेट ना देकर शरद पात्र ने किसी और ही ट्रैक में जाते हुए किसी और का सर्टिफिकेट दे दिया

यह कहानी की पहली कड़ी है शरद पवार को बचाने के लिए संवाद जो दस्तावेज चोरी होने का ढोंग कर रही है इस विषय पर भी जल्द ही खुलासा करेंगे

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