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भाभी एक नंबरी तो नंनद दस नंबरी, हाईकोर्ट की महिला वकील के 420 वाले कारनामे

हाईकोर्ट की महिला वकील ने बखूबी खेला कानूनी दांव,पहले बेची जमीन फिर ऐंठे पैसे लेकिन जमीन कर दी ननंद के नाम

रायपुर।बदलते परिवेश के इस दौर में आजकल लोग जो भी करते हैं वह सिर्फ और सिर्फ अपने मुनाफे को ताक में रखकर करते हैं। परिवर्तन के इस दौर में अब कुछ भी पहले जैसा ना रहा अब दूसरे का दुख देखकर लोग दुखी नहीं होते बल्कि इनसे मुंह फेर लेते हैं क्योंकि इनसे उसका कोई सरोकार नहीं या यूं कहें कि इससे उनको कोई मुनाफा नहीं। आजकल लोग पुलिस में भर्ती लोगों की सेवा करने के लिए, उन्हें सुरक्षा देने के लिए नहीं बल्कि काम नहीं करने और सच छुपाने के एकज में ज्यादा पैसा वसूली करने के लिए होते हैं। नेता,मंत्री प्रदेश की बागडोर संभाल कर लोगों की, जनता की भलाई और हित के लिए सोचने के लिए नहीं बल्कि विपक्षियों से और कुछ लोगों से अपने आपसी रंजिश भुनाने के लिए प्रदेश की बागडोर संभालने का दिखावा करते हैं।

गैर व्यापारिक संस्था कहे जाने वाले अस्पताल और स्कूल भी आज व्यापार करने के होड़ में सबसे आगे हैं तो ऐसे में भला लोगों को न्याय दिलाने के लिए  वकालत करने वाले भला कैसे पीछे हट सकते हैं। आजकल लोग वकालत ही इसलिए करते हैं ताकि कानूनी दांवपेच सीखकर सामने वाले को बेवकूफ बनाकर कैसे उनसे पैसा ऐठा जा सकता है और इसके लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत भी नहीं है कुछ ऐसा ही मामला या यूं कहें कि कारनामा खुद को हाई कोर्ट का वकील कहीं जाने वाली महिला का सामने आया है जिन्होंने अपने कानूनी दांवपेच का बखूबी इस्तेमाल कर बेची हुई जमीन से मोटी रकम वसूल कर जमीन को अपनी ननंद के नाम कर दिया।

धमतरी निवासी बुशरा रजा शरीफ महिला जो खुद को हाई कोर्ट का वकील कहती है ने लगभग 4 साल पहले पति की मृत्यु के बाद खुद को जमीन का एकलौता हकदार बता कर, राजधानी के मोवा निवासी एजाज कुरैशी से जमीन का सौदा किया गया और इसके एवज में पीड़ित से 42 लाख रुपये भी लिए।

लेकिन इसके बाद शातिर महिला ने क़ानूनी दावपेंच खेल चलाकी से ‘हक़ त्याग प्रतिलिपि’ का प्रयोग कर जमीन को अपनी ननद के नाम कर दिया। लेकिन जब प्रार्थी ने इसका विरोध किया तब महिला ने प्रार्थी को दूसरी जमीन देने का आश्वासन देकर उन्हें फिर बेवकूफ बनाया लेकिन प्रार्थी को अब तक कोई भी जमीन नहीं दी गई।

इस मामले को 4 साल हो गए हैं 2017 का यह मामला है लेकिन अब तक इस गंभीर मामले में कोई भी उचित कार्यवाही नहीं की गई है प्रार्थी आज भी अपने हक के पैसे के लिए उचित कार्यवाही की बाट जोहते बैठा है लेकिन अब तक इसका निराकरण नहीं हो पाया है।बता दें प्रार्थी रायपुर के मोवा निवासी ऐजाज कुरैशी द्वारा मोवा में धमतरी निवासी बुसरा रजा सरीफ धमतरी निवासी द्वारा जमीन ख़रीदा जाना तय हुआ था जिस जमीन का सौदा ऐजाज़ कुरैशी ( प.ह.न. 39/109 ग्राम मोवा खसरा नंबर 351 रकबा 1721 वर्गफीट तथा खसरा नंबर 323 रकबा 18000 वर्गफीट भूखण्ड) के साथ हुआ।

जिसको बुसरा रजा सरीफ ( प.ह.न. 39/109 ग्राम मोवा खसरा नंबर 351 रकबा 1721 वर्गफीट तथा खसरा नंबर 323 रकबा 18000 वर्गफीट भूखण्ड) ने अपने पति की अर्जित संपत्ति बता कर और अपने पति की मृत्यु के बाद खुद को एकलौता हकदार बता कर प्रार्थी सनम ऐजाज़ कुरैशी से बिक्री के लिए सौदा किया और उक्त जमीन के नाम पर ब्याना राशी दस लाख और बत्तीस लाख कुल मिलाकर 42 लाख रूपए वसूल कर लिए और आश्वासन दिया की जमीन का नाम आपके नाम पर ट्रांसफर व रजिस्ट्री होने के बाद बाकि की राशी ले लेगी।

लेकिन आरोपी बुसरा रजा सरीफ ने ऐजाज़ कुरैशी को धोका देने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा था और ब्याना के 42 लाख रुपए हड़पने के लिए ये पूरी साजिश की थी जिसके बाद आरोपी महिला ने कानूनी दाव खेल जमीन को अपनी ननद नूर बेगम को हक़ त्याग अभिलेख तैयार कर दे दिया गया और प्रार्थी ऐजाज़ कुरैशी को न ही जमीन दिया और न ही जो 4200000 रुपए लिए उसे वापस किया। 

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े जालसाजी का जाल फैलाने वाली इस महिला के खिलाफ अब तक क्यों पुलिस प्रशासन ने कोई भी कड़ी कार्यवाही नहीं की। जब न्याय की गुहार लगाने वाले ही सरेआम न्याय को ताक में रखकर अपराधिक कृत्य को अंजाम देने के बावजूद भी इस तरह खुलेआम घूमते रहेंगे तो फिर ऐसे में निर्दोष और ठगी का शिकार हुए लोगों का तो भगवान ही मालिक है तो कि न्याय तो उन्हें मिलने से रहा।

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