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श्री रावतपुरा सरकार इंटरनेशनल स्कूल आज से पूर्णतः बंद, बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित पालक

रायपुर। प्रदेश भर में व्याप्त कोरोनावायरस ने एक ओर जहां पूरे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है तो वहीं दूसरी ओर इसका सीधा प्रभाव बच्चों के भविष्य पर भी पड़ा है कुछ बच्चे तो ऐसे भी हैं जिनकी उम्र स्कूल जाने लायक हो गई है, लेकिन स्कूल के नाम पर उन्होंने स्कूल की इमारत तक नहीं देखी। ऑनलाइन पढ़ाई की बेड़ियों में जकड़े बच्चों का भविष्य ऐसे ही दोराहे पर चलते नजर आ रहा है।

इसी बीच श्री रावतपुरा सरकार इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पालकों को एक बड़ा झटका लगा है गंभीर वित्तीय संकट के कारण श्री रावतपुरा सरकारी स्कूल को आज से यानी 31 मई से आधिकारिक रूप से बंद करने का फैसला स्कूल द्वारा लिया गया है। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों की शिक्षा तो प्रभावित हुई ही हुई है, साथ ही परिजनों की मुश्किलें भी बढ़ गई है। इस तरह अचानक स्कूल बंद करने का फैसला स्कूल प्रबंधक द्वारा लिया गया जब पालकों को किसी दूसरे स्कूल में अपने बच्चों से दाखिल कराने के लिए सोचने का भी समय नहीं मिला।

स्कूल बंद करने का फैसला लेने के एक दिन पूर्व हालांकि स्कूल प्रबंधक द्वारा पेरेंट्स मीटिंग बुलाई गई थी लेकिन जब बच्चों के पालक स्कूल पहुंचे तब उन्हें वहां कोई भी नहीं मिला नाही पालकों को प्रबंधक के साथ जवाब तलब करने का मौका मिला। स्कूल प्रबंधक ने अपनी ओर से मीटिंग बुलाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों के भविष्य की चिंता पालकों के मत्थे मढ़ दिया।

किसी भी गंभीर मामले में फैसला लेने से पूर्व एक माह का समय जरूर दिया जाता है लेकिन स्कूल प्रबंधक द्वारा बच्चों के परिजनों को इस विगत परिस्थिति से अवगत कराने के लिए और अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला देने की बात कहने के लिए एक माह का समय भी नहीं दिया गया और बहुत ही शॉर्ट नोटिस में आनन-फानन में ऑनलाइन मीटिंग बुलाकर इस बात की घोषणा कर दी।

लेकिन अब इन सब के बीच इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और पालक अधर में अटके हुए हैं उनके पास एक तरफ कुआं एक तरफ खाई वाली स्थिति निर्मित हो गई है। पालकों से फीस और तरह-तरह के व्यय बता कर मनमानी फीस वसूलने के लिए निजी स्कूलों द्वारा पहले से ही नोटिफिकेशन दिया जाता है लेकिन इतना बड़ा फैसला लेने के ठीक 1 दिन पहले इस बात की जानकारी स्कूल द्वारा पालकों को दी गई यह साफ तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। राजधानी में ऐसे और भी बहुत सारे निजी स्कूल है जो परिजनों को एटीएम समझ कर उनसे मनमानी फीस वसूल करते हैं लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए उनकी कोई खास जवाबदारी देखने को नहीं मिल रही।ऐसे में वह दिन भी दूर नहीं जब इतने बड़े स्कूल के इस रवैए को देखकर निजी स्कूल वाले भी उनकी राह पर चलते हुए अचानक से वित्तीय संकट की बात कहते हुए स्कूल बंद करने की घोषणा कर दें।

बहर हाल सभी पालकों के लिए यह एक सबक है अब परिजनों को चाहिए कि जिनके बच्चे जिस जिस भी निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं उस स्कूल के प्रबंधक और संचालक से लिखित में ऐसा एक आवेदन जरूर लेकर रखें ताकि किसी और स्कूल द्वारा इस तरह बच्चों के भविष्य को दरकिनार करते हुए वित्तीय संकट की बात कहते हुए स्कूल को बंद करने से पहले कम से कम 1 महीने पहले पालकों के पास अपने बच्चे के दाखिले के लिए सोचने का समय मिल सके।

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