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वृहस्पत रूपी मोहरा कहीं बन न जाए ‘शनि’ टीएससी देव को टारगेट करना पार्टी को पड़ सकता है भारी

केंद्र और आलाकमान के सामने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव की छवि धूमिल करने के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने जो वृहस्पत का मोहरा बिछाया था कहीं ऐसा ना हो कि अब वही मोहरा उनके लिए शनि साबित हो जाए।

कहते हैं एक शांत समुद्र ही अक्सर बड़े तूफान लेकर आता है, ऐसे में टीएस बाबा के शांत स्वभाव का फायदा उठाकर अनर्गल बयानबाजी करने के चलते कहीं ऐसा ना हो कि इसका बड़ा भुगतान कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़े। क्योंकि लगातार जिस तरह से आरोप टीएस सिंह देव पर लग रहे हैं और इसके बाद भी प्रदेश सरकार का इस मामले में इतना सुस्त रवैया इनसब से आहत होकर जो बयान टीएस बाबा ने दिया है “आखिर मैं भी तो एक इंसान हूं” यह कहीं ना कहीं इस बात की ओर इशारा करता है

कि उनके दिल को अपने पार्टी के इस क्रिया कलाप से गहरा धक्का लगा है। भले ही वह बाकियों की तरह चीख-पुकार कर अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार साबित करने के लिए हंगामा नहीं कर रहे हो लेकिन,अब यह जरूर समझ आ गया है कि प्रदेश में जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया जा रहा है इन सब से उनको ठेस जरूर पहुंचा हैं।

बिना किसी साक्ष्य के अपने ही पार्टी के वरिष्ठ मंत्री जिनके स्वभाव से जनता ही नहीं बल्कि पूरे राजनीतिज्ञ भलीभांति परिचित हैं, उनके ऊपर इतना बड़ा आरोप लगाना अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह शायद जोश जोश में यह भूल गए कि वह सरकार द्वारा बिछाए गए केवल एक मोहरे है

ढाई साल की पारी को जनता के दिमाग से हटाने के लिए टीएस बाबा की छवि खराब करने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है और लगातार वह अनर्गल बयानबाजी करते हुए सुर्खियां बटोरने में मशगूल है। वही दूसरी ओर इतने बड़े आरोपों के बीच भी मंत्री सिंहदेव का सहज भाव में उत्तर देना यह समझने के लिए काफी है कि वास्तविकता क्या है।

प्रदेश में भूपेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होते ही टीएस सिंह देव को अगली ढाई वर्ष की पारी नहीं देने के लिए जो नाटकीय घटनाक्रम कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया है यह सभी के समझ में आने लगा है। भले ही भूपेश सरकार जनता को बेवकूफ समझती हो या फिर खुद को जरूरत से ज्यादा चालाक और उन्हें लगता है कि जनता को उनकी चालाकियां समझ नहीं आती, पर शायद भूपेश सरकार यह भूल रही है कि जनता इतनी भी बेवकूफ नहीं जो यह न समझ पाए कि सत्ता हाथ से फिसलने के चक्कर में ऐसे व्यक्ति को टारगेट किया जा रहा है

जिसने स्वयं पीछे हटकर भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया और जो स्वयं एक राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में महज एक पद के लिए टी एस सिंह देव इतना बड़ा रिस्क कभी नहीं उठाएंगे क्योंकि अगर पद लालसा ही होती तो वह उस वक्त भी आलाकमान पर दबाव बनाकर आसानी से पद अपने नाम करवा सकते थे। लेकिन वह शुरू से कहते आए हैं कि उनके लिए जनता की सेवा करना ज्यादा महत्वपूर्ण है उनके लिए कोई पद मायने नहीं रखता।

लेकिन 15 साल बाद सत्ता मिलने का लोभ शायद भूपेश सरकार के ऊपर कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है, शायद इसीलिए वह ऐसे दकियानूसी हथकंडे अपनाते हुए किसी भी हालत में सत्ता अपने हाथ में ही रहने देना चाहती है। पर वह यह भूल रहे है कि ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में इसका बड़ा खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

क्योंकि जो स्वयं अपने पार्टी के अंतः कलह को नहीं मिटा पा रहे और जनता के सामने यह खुलकर सामने आ रहा है कि कांग्रेस पार्टी में जितने भी नेता मंत्री हैं उन्हें केवल पद मोह है,जनता की सेवा करना उनकी प्राथमिकता नहीं ऐसे में जनता इतनी बड़ी बेवकूफी थोड़ी करेगी दोबारा उन्हें सत्ता में बैठा कर।

खैर जो भी हो पर इन सब से यह लगता है कि, कांग्रेस पार्टी की विनाश काले विपरीत बुद्धि हो गई है। तभी तो 15 साल बाद मिली जीत को भी प्रदेश सरकार संभाल नहीं पा रही या यह भी हो सकता है कि शायद 15 साल में कांग्रेस राजनीति करना ही भूल गई है।

बहर हाल इस पूरे मामले में जो आपातकाल बैठक का बिगुल विधानसभा और सीएम हाउस में बजा है, हो ना हो इसकी गाज विधायक पर ही गिर सकती है। लाइमलाइट में आने और सीएम के सामने अपनी वाहवाही बटोरने के लिए वृहस्पत सिंह ने जो यह दांव खेला था कहीं यह दावा उन पर ही भारी न पड़ जाए! क्योंकि आलाकमान इतनी बेवकूफ तो नहीं है

कि टीएस बाबा से दुश्मनी मोल ले जिन्होंने उनकी पार्टी की लाज बचा कर रखी है और देश में कांग्रेस की जो बची खुची इज्जत है और छत्तीसगढ़ की जो पहचान है व टीएस सिंह देव की वजह से ही है तो ऐसे में महज एक विधायक के इस हाई वोल्टेज ड्रामा को तूल देते हुए टीएस बाबा के पर संदेह करें यह गलती आलाकमान तो नहीं कर सकते।

यह सारे नाटकीय घटनाक्रम करके टीएस सिंह देव की छवि धूमिल करने के लिए जो हथकंडे भूपेश सरकार अपना रही है वह सिर्फ और सिर्फ सत्ता की बागडोर को अपने हाथों से फिसलने से रोकने के लिए है। पर जो भी हो कांग्रेस के इस आपसी कलह से विपक्षियों का भरपूर मनोरंजन जरूर हो रहा है और उन्हें एक नया मुद्दा मिल गया है कांग्रेस की किरकिरी करने का।

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