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खबर लगाने पर टीआई देते हैं लीगल नोटिस भेजने की धमकी, किसकी आड़ में बनकर बैठे हैं रसूखदार

महासमुंद। पत्रकारों का दुर्भाग्य कहिए या फिर भ्रष्टाचार लोगों के कनेक्शन सरकार में बैठे लोगों के साथ होना कहिए दोनों ही सूरत में पत्रकारों पर अपमान की सुई लटक रही है। लगातार महासमुंद के यातायात प्रभारी दीपेश जायसवाल के खिलाफ मिल रही जानकारी के अनुसार खबर प्रकाशित करने पर दीपेश जायसवाल हमारे संवाददाता को लीगल नोटिस भेजने की धमकी देते हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त दीपेश जायसवाल का कारनामा स्थानीय लोगों में जगजाहिर है, इसके बावजूद भी इनके ऊपर कोई कार्यवाही ना होना और इन्हें संरक्षण देना ही इनके हौसलों को और उड़ान दे रहा है।

चाहे बात हो कोमाखान की, पिथौरा की या फिर महासमुंद की दीपेश जायसवाल जिस जगह भी पदस्थ रहे उन हर जगहों में इनके द्वारा भ्रष्टाचार के कारनामे निकल कर सामने आए हैं। पिथौरा वाले एक मामले में डीजीपी के आदेशों की अवहेलना करने वाले दीपेश जायसवाल के करतूतों को देखते हुए पिथौरा मामले में एफ आई आर दर्ज करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले में दखल देते हुए दीपेश जायसवाल को आदेशित किया, इससे ही स्पष्ट हो जाता है कि दीपेश जायसवाल अपने पद का किस हद तक दुरुपयोग कर रहे हैं। बावजूद इनके इनके ऊपर कोई कड़ी कार्यवाही ना होना इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं ना कहीं किसी बड़े अधिकारियों के साथ इनका सांठगांठ है जो हर बार इन्हे बचा लेते हैं। बहरहाल हाल ही में 12 मई को महानदी मोड़ पर बिना अधिकारी की मौजूदगी में विक्रांत पांडे एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा मास्क चेकिंग की आड़ में वाहनों से वसूली करने की जानकारी मिली जिसे एसपी ने रंगे हाथों पकड़ा और उनसे ऐसा करने का कारण पूछा, तब विक्रांत पांडे एवं अन्य दो पुलिसकर्मी ने बताया कि हमारे अधिकारी दीपक जायसवाल ने हमें ऐसा करने के लिए आदेशित किया है इसके बाद एसपी ने पुलिस कंट्रोल रूम में 12 मई को ही इनके खिलाफ शिकायत दर्ज की लेकिन एसपी के अनुपस्थिति में दीपेश जायसवाल और ऐसे वसूली बाज कर्मचारियों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी । वहीं इस मामले की जानकारी मिलते इस खबर को प्रकाशित किया गया जिसके बाद दीपेश जायसवाल ने हमारे संवाददाता को लीगल नोटिस भेजने की धमकी तक दे डाली। क्या वाकई खाकी वर्दी पहनने वालों के पास इतना हक है कि वह सच कहने वालों के ऊपर ही कार्यवाही करने का दम रखते हैं और यदि रखते हैं तो आखिर कौन इन्हें ऐसा करने के लिए शरण देता है? अपराधियों को बढ़ावा देकर न्याय करने वाले और सच दिखाने वालों के ऊपर ही अगर कार्यवाही होनी शुरू हो जाए तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा प्रदेश भ्रष्ट युक्त राज्य की श्रेणी में आ जायेगा। क्योंकि कुछ ऐसे ही भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी ही है जो नेता मंत्रियों के नाम को खराब करने का काम करते हैं। खुद गलत कृत्य में लिप्त होते हैं लेकिन बचाव के लिए बड़े-बड़े नेता मंत्रियों का नाम लेकर लोगों के सामने उनकी छवि खराब करने से पीछे नहीं हटते।

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