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जब राजा हुआ अंधा तब प्रजा ने संभाली डायोसिसों को बचाने कमान, पिसी सिंह के घिनोने चाल पर सुरेश जैकब का प्रहार

अपने शरीर का अगर एक भी अंग चोटिल हो जाए या कट जाए तो उसकी तकलीफ से उभर पाना शायद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है यही कारण है कि हर व्यक्ति अपने चोटिल हुए अंग को ठीक करने की तमाम कोशिशें करता है।ठीक इसी प्रकार जितने भी डायसिस हैं वह सभी सीनेट के अंग है सभी डायसिस की श्रृंखला ही सीनेट को मजबूत करती है अगर इनमें से एक डायसिस भी अलग हो जाए तो सीनेट कमजोर पड़ जाएगा!

लेकिन दुख की बात तो यह है कि सी एन आई के मॉडरेटर पीसी सिंह को इस बात की जरा भी परवाह नहीं या फिर यह भी हो सकता है कि वह सिनोड या डायसिस को अपना परिवार ही ना मानते हो क्योंकि इन्हें इस गद्दी के एवज में सिर्फ और सिर्फ अपने जेब भरने से मतलब है यही कारण है कि सीएनआई के गठन से लेकर अब तक जो छोटा नागपुर डायोसिस जिस सीएनआई का हिस्सा था उसने अपने आप को c.n.i. से अलग कर लिया,इसके बावजूद भी पीसी सिंह के कान में जूं तक नहीं रेंगी।

इससे तो साफ तौर पर यही बात समझ आती है कि पीसी सिंह समाज को जोड़ने में नहीं बल्कि तोड़ने में विश्वास रखते हैं समाज जुड़े या टूटे इनसे इनको फर्क नहीं.वैसे भी इनको मतलब है तो सिर्फ और सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने से!

छोटा नागपुर डायसिस को अलग हुए काफी दिन बीत गए लेकिन इसके बाद भी किसी भी नामजादों ने इसे वापस सीएनआई में मिलाने की पहल नहीं की लेकिन वही सुरेश जैकब बार-बार इस ओर पहल कर रहे हैं कि कैसे भी करके वापस छोटानागपुर डायसिस सीएनआई से मिल जाए। इनका यह प्रयास ऐसे लोगों के मुंह पर तमाचा है जो समाज के लिए बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन जब वाकई कुछ करने की बारी आती है तो दुम दबाकर भाग निकलते हैं।

अगर यही प्रयास समाज के सभी लोग मिलकर करें तो इन डायोसिसों को टूटने से बचाया जा सकता है और सी एन आई के गद्दी पर किसी ऐसे व्यक्ति को बैठा कर समाज का भला किया जा सकता है जो वाकई संगठन की ताकत को समझता हो ना कि इन्हें टूटता देख कर भी शांत बैठा हो। सुरेश जैकब द्वारा किया गये इस पहल की समाज के लोगों में काफी सराहना की जा रही है।

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