Delhi-NCRFeaturedMadhya PradeshMaharashtraUttar Pradesh

केरल-गुजरात से झारखंड आए मजदूर बोले- हमसे वसूला 700 से 875 तक किराया

News Ads

झारखंड लौटे मजदूरों और कामगारों का कहना है कि एक-एक मजदूर से 875 रुपये बतौर भाड़ा वसूला गया था, बहुतों को तो टिकट की राशि का जुगाड़ करने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा.

केरल के तिरुवनंतपुरम से 1129 मजदूरों का जत्था लेकर विशेष ट्रेन सोमवार शाम देवघर के जसीडीह स्टेशन पहुंचा. इनमें से अधिकांश मजदूर संतालपरगना के रहने वाले हैं. इसके अलावा साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा, गिरिडीह, गढ़वा, लातेहार, रामगढ़, धनबाद और गुमला जिला के रहने वाले हैं. इन सभी मजदूरों से रेल किराया लिया गया था.

घर लौटे इन मजदूरों और कामगारों का कहना है कि एक-एक मजदूर से 875 रुपये बतौर भाड़ा वसूला गया था, बहुतों को तो टिकट की राशि का जुगाड़ करने में भारी मसक्कत का सामना करना पड़ा, हालांकि इसी में उन्हें यात्रा के दौरान खाने का पैकेट भी उपलब्ध कराया गया था. स्टेशन पहुंचने के बाद सभी मजदूरों को बस से संबंधित जिले में भेजा गया.

सूरत से आए मजदूरों से भी लिए गए पैसे

इसी तरह सूरत से झारखंड आए 1200 मजदूरों ने भी रेल टिकट दिया. लॉकडाउन के बीच फंसे इन मजदूरों के पास सूरत में खाने पीने का ठिकाना नहीं था तो भला अपने गांव कैसे ट्रेन से यात्रा कर पाते. कई लोगों ने अपने गांव से रुपए मंगाए थे तो किसी ने अपने मालिक से उधार लिए थे. इन मजदूरों से यात्रा के लिए 700-700 रुपये लिए गए थे.

More Article from World

सीएम हेमंत सोरेन ने उठाए सवाल

इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे पर बड़ा सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि रेलवे ने पीएम राहत कोष में 150 करोड़ रूपये का योगदान दिया है. कहीं ये पैसे मजदूरों से लेकर तो नहीं दिए गए. अगर ऐसा है तो आश्चर्य का विषय है. मजदूरों से रेल किराया लेने की खबरों पर सीएम हेमंत सोरेन ने यह बात कही थी.

8-9 लाख मजदूरों-छात्रों को लाया जा रहा वापस

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश का अकेला ऐसा राज्य है, जो रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व देता है, इसलिए यहां के मजदूरों और छात्रों से छूट मिलना चाहिए. बता दें कि लॉक डाउन में देश के अन्य राज्यों में फंसे झारखंड के लगभग 8 से 9 लाख मजदूर, कामगार और छात्रों को वापस लाया जा रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Around The World
Back to top button
Contact Us