धमतरी में जमीन घोटाले का खुलासा: सरकारी भूमि पर संगठित अवैध प्लॉटिंग पर विधायक ओंकार साहू का बड़ा एक्शन, त्वरित कार्रवाई की मांग

धमतरी में जमीन का खेल अब खुलकर सामने आने लगा है। शहर से लगे इलाकों में जिस तेजी से अवैध प्लॉटिंग का जाल फैल रहा है, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस पूरे मामले में उस वक्त बड़ा मोड़ आया, जब क्षेत्रीय विधायक ओंकार साहू अचानक एकता हॉस्पिटल के नहर पार इलाके में पहुंचे और जमीन पर चल रहे पूरे खेल को अपनी आंखों से देखा।
“जमीन तैयार, खरीदार का इंतजार” – यही है खेल
मौके पर जो तस्वीर सामने आई, वह किसी सुनियोजित प्लान से कम नहीं थी। सरकारी जमीन को पहले समतल किया गया, फिर उस पर मुरूम डालकर लंबी सड़क बनाई गई, ताकि देखने में यह एक विकसित कॉलोनी जैसा लगे। करीब एक किलोमीटर तक बनी यह कच्ची सड़क साफ बता रही थी कि यहां प्लॉट काटने की तैयारी पूरी हो चुकी है—बस खरीदारों को लुभाने की देर है।
खेती नहीं, सेटअप है ‘प्लॉटिंग’ का
नहर के पार लगे ड्रिप सिस्टम ने इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। पहली नजर में यह खेती का हिस्सा लगता है, लेकिन असल में यह जमीन को “यूज में” दिखाने का तरीका माना जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक, ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल अक्सर जमीन को वैध दिखाने और भविष्य में कागजी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किया जाता है।

सड़कों की हालत खराब, जिम्मेदार कौन?
इस पूरे अवैध खेल का असर अब आम लोगों पर दिखने लगा है। भारी हाइवा वाहनों की लगातार आवाजाही से नगर निगम की केनाल रोड टूटने की कगार पर पहुंच गई है।
- सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे
- रोजाना जाम और दुर्घटना का खतरा
- स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश
लोगों का कहना है कि “कुछ लोगों के फायदे के लिए पूरे इलाके को परेशानी झेलनी पड़ रही है।”
विधायक का सख्त तेवर
निरीक्षण के दौरान विधायक ओंकार साहू ने साफ शब्दों में कहा कि “सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।” उन्होंने अधिकारियों को तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। साथ ही चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।
प्रशासन पर उठे सीधे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- लंबे समय से शिकायतें आती रहीं
- जिम्मेदार विभागों को जानकारी थी
- फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
विधायक ने यहां तक कह दिया कि कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध लगती है और मामले में मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता।

“जनता ठगी का शिकार न हो”
अवैध प्लॉटिंग का सबसे बड़ा खतरा आम लोगों के लिए होता है।
लोग अपनी मेहनत की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं और बाद में पता चलता है कि वह जमीन सरकारी या विवादित है।विधायक ने कहा कि “यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, जनता के भरोसे का सवाल है।”
मौके पर प्रशासन, लेकिन अगला कदम?
निरीक्षण के दौरान तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, पटवारी और नगर निगम के इंजीनियर मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भीड़ भी मौके पर जुटी रही। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा या सच में कार्रवाई होगी?
अब फैसला प्रशासन के हाथ में
धमतरी में अवैध प्लॉटिंग का यह मामला एक चेतावनी है—अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा। विधायक के सख्त रुख के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिक गई हैं। क्या भू-माफियाओं पर गिरेगा कानून का डंडा, या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा?









