कुरूद-सिलयारी गांव बना नशा और सट्टे का अड्डा, प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल

रायपुर/धरसींवा। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे धरसींवा ब्लॉक के कुरूद-सिलयारी ग्राम पंचायत में नशा, सट्टा और अवैध शराब का खुलेआम कारोबार अब गांव की सामाजिक संरचना को खोखला कर रहा है। कभी सौहार्द और शांति के लिए जाना जाने वाला यह गांव अब नशेड़ियों और सट्टेबाजों का गढ़ बनता जा रहा है।
- 1xbet APK 2021 : guide complet de l’application mobileOctober 24, 2026
- Aviator APK Overview and OptionsOctober 24, 2026
- Aviator Casino Game Demo: Steps and MethodsOctober 24, 2026
- Unanswered Questions on Rezon Casino Вход That You Should Know AboutOctober 24, 2026
गांव की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि स्थानीय निवासियों ने अपनी दीवारों पर ही विरोध दर्ज करना शुरू कर दिया है — “मेरे मकान के पीछे मिलता है गांजा” जैसे नारों ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ाने की कोशिश तो की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पुलिस चौकी के पास चल रहा धंधा
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार सिलयारी पुलिस चौकी से मात्र 200 मीटर की दूरी पर चल रहा है। शाम ढलते ही नशेड़ियों और जुआरियों का जमावड़ा गलियों में नजर आने लगता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों की कई शिकायतों के बावजूद, पुलिस की चुप्पी ने प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम पंचायत भी बेबस, युवा पीढ़ी पर खतरा
गांव में स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बाजार की सुविधाएं होने के बावजूद, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि भी इस समस्या पर अंकुश लगाने में विफल रहे हैं। सबसे बड़ा खतरा गांव की युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा है, जो तेजी से नशे और सट्टे की चपेट में आ रही है। इससे न सिर्फ उनका भविष्य खतरे में है, बल्कि पूरा गांव सामाजिक विघटन की ओर बढ़ रहा है।
ज़रूरत सख्त कार्रवाई की
कुरूद-सिलयारी में नशा और सट्टे का यह फैलता जाल अब सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट बन चुका है। प्रशासन को अविलंब कठोर कदम उठाने होंगे, ताकि गांव को इस अंधकारमय रास्ते से वापस रोशनी की ओर मोड़ा जा सके। ग्रामीणों की पीड़ा और दीवारों पर लिखे संदेश अब और अनसुने नहीं किए जा सकते।