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संसद में हंगामा, उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष के सवाल तेज

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत ही सियासी उथल-पुथल से हुई है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से जहां एक ओर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगातार स्थगित हो रही है। मंगलवार को भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

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धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष का संदेह
कांग्रेस सहित विपक्षी दल इस इस्तीफे को महज “स्वास्थ्य कारणों” से जोड़कर नहीं देख रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा, “जो दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक गहराई है। प्रधानमंत्री मोदी को धनखड़ को मनाने की कोशिश करनी चाहिए – यह राष्ट्रहित में होगा, खासकर किसानों के लिए।”

प्रमोद तिवारी ने बताया संसदीय इतिहास का ‘काला दिन’
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने धनखड़ के इस्तीफे को चौंकाने वाला बताया और कहा कि, “वो एक अनुभवी और जनसरोकार से जुड़े सभापति थे। उन्हें दोबारा विचार करना चाहिए। यह संसदीय परंपरा के लिए दुखद है।”

‘स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी’ – कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए कि अगर स्वास्थ्य ही कारण था, तो इस्तीफा मानसून सत्र से पहले क्यों नहीं दिया गया? भगत ने कहा, “धनखड़ पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे। यह फैसला अचानक लिया गया, जिसे सामान्य नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने इस स्क्रिप्ट को पहले ही तैयार कर लिया था।

कांग्रेस ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री बैठक से नदारद रहे, जो दर्शाता है कि घटनाक्रम पहले से तय था।

धनखड़ ने क्या कहा अपने इस्तीफे में?
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में कहा कि वे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था। अब जब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, तो राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सदन की कार्यवाही देखेंगे।

Desk idp24

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