रायगढ़ : उद्योगों की मनमानी चरम पर, करोड़ों का जलकर दबा बैठे…प्रशासन वसूली में नाकाम

रायगढ़। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला रायगढ़ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई नया निवेश या रोजगार नहीं, बल्कि उद्योगों की मनमानी है। जिले के कई उद्योग प्रबंधन वर्षों से करोड़ों रुपये का जलकर बकाया रखे हुए हैं और प्रशासन केवल नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर रहा है। वसूली के मामले में प्रशासन की निष्क्रियता ने उद्योगों के हौसले और बढ़ा दिए हैं।
जलकर बकाया: प्रशासन को करोड़ों का नुकसान
जिले के जल संसाधन विभाग के अनुसार, कई बड़े उद्योग वर्षों से जलकर जमा नहीं कर रहे हैं। ये वही उद्योग हैं जो सरकारी जमीन पर स्थापित होकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक जल-संपदा का भारी दोहन कर रहे हैं, लेकिन जब बारी भुगतान की आती है तो सरकार को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं।
नोटिस की खानापूर्ति, सख्ती नदारद
विभाग द्वारा समय-समय पर उद्योगों को बकाया जलकर के लिए नोटिस जरूर भेजे जाते हैं, लेकिन उनके खिलाफ वसूली की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। नतीजा यह है कि उद्योगों को प्रशासन का डर नहीं रह गया है और वे खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर संचालन कर रहे हैं।
प्रदूषण, जीएसटी चोरी, श्रमिकों की मौत – सबमें उद्योगों की मनमानी
यह पहला मामला नहीं है जब रायगढ़ के उद्योगों की गैरजवाबदेही सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार प्रदूषण फैलाने, जीएसटी चोरी, और श्रमिकों की असमय मौत जैसे गंभीर मामलों में इन उद्योगों की लापरवाही उजागर हो चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन की निष्क्रियता इन उद्योगों को परोक्ष रूप से संरक्षण दे रही है।
क्या होना चाहिए प्रशासन का अगला कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार राजस्व की हानि रोकना चाहती है तो उसे जलकर वसूली के मामलों में सख्त कदम उठाने होंगे। सिर्फ नोटिस भेजना पर्याप्त नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई, जल आपूर्ति रोकने, और बकायेदार उद्योगों की सूची सार्वजनिक करने जैसे उपाय किए जाने चाहिए।








