बड़ा खुलासा या बड़ी गलतफहमी?

दिल्ली से आया आधिकारिक पत्र, छत्तीसगढ़ डायसिस पर जाँच की चर्चाओं पर लगा ब्रेक!रायपुर | विशेष रिपोर्ट | प्राइम टाइम फोकसक्या छत्तीसगढ़ डायसिस पर वाकई कोई जाँच कमेटी बनी थी?क्या 117वीं एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में कोई कठोर निर्णय लिया गया था?या फिर कुछ दावों ने स्थिति को वास्तविकता से अलग दिशा दे दी?इन सवालों के बीच अब तस्वीर साफ होती दिख रही है।दिल्ली स्थित CNI Synod कार्यालय से जनरल सेक्रेटरी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र ने स्पष्ट किया है कि 17 फरवरी 2026 को CNI भवन, नई दिल्ली में हुई बैठक और 18–19 फरवरी को आयोजित 117वीं एक्जीक्यूटिव कमेटी मीटिंग में छत्तीसगढ़ डायसिस के विरुद्ध किसी फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन नहीं किया गया।यह बयान उस समय आया है जब डायसिस को लेकर विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएँ चल रही थीं।

कुछ दावों में जाँच प्रक्रिया की बात कही जा रही थी, जिसने चर्च के भीतर असमंजस का माहौल बना दिया था।अब जब आधिकारिक पत्र सामने आ चुका है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है क्या पहले फैलाई गई सूचनाएँ अधूरी थीं? क्या संवाद की कमी ने भ्रम को जन्म दिया?हालाँकि, Synod के पत्र का स्वर टकराव का नहीं, बल्कि संवाद और मेल-मिलाप का है। इसमें शांति, एकता और पारस्परिक सम्मान के साथ आगे बढ़ने की अपील की गई है।धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में पारदर्शिता और आधिकारिक संचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब आधिकारिक दस्तावेज सामने आते हैं, तो वे अटकलों की जगह तथ्य स्थापित करते हैं।छत्तीसगढ़ डायसिस के कई सदस्यों का कहना है कि अब समय है कि सभी पक्ष भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय आधिकारिक तथ्यों को प्राथमिकता दें और संस्था की गरिमा बनाए रखें।फिलहाल, एक बात स्पष्ट है दिल्ली से आए इस पत्र ने बहस को नई दिशा दे दी है।अब देखना यह होगा कि आगे की बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या यह घटनाक्रम चर्च में स्थायी शांति और समन्वय का मार्ग प्रशस्त करेगा।








