हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 12AA पंजीकृत संस्थाओं की गतिविधियों की दोबारा जांच का अधिकार नहीं आयकर विभाग को

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 12AA पंजीकृत संस्थाओं को लेकर आयकर विभाग के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्था आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12AA के तहत वैध रूप से पंजीकृत है, तो आयकर विभाग को उसकी गतिविधियों की दोबारा जांच करने का अधिकार नहीं है, खासकर जब वह संस्था 80G के तहत टैक्स छूट की पात्रता रखती हो।
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यह फैसला आधारशिला शिक्षण संघ की याचिका पर आया, जिसने 80G छूट न मिलने पर आयकर आयुक्त के फैसले को चुनौती दी थी। संस्था व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में छात्रों को हॉस्टल सुविधा देने जैसे कार्यों में संलग्न है।
रायपुर आयकर आयुक्त ने संस्था की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह फीस लेती है, किराये पर भवन देती है और व्यावसायिक स्वरूप रखती है। इसके आधार पर 80G का आवेदन अस्वीकार कर दिया गया था।
हालांकि, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) रायपुर ने 2019 में संस्था के पक्ष में फैसला सुनाया। उसने कहा कि जब तक 12AA पंजीकरण वैध है, तब तक उसकी गतिविधियों पर सवाल उठाना अनुचित है।
हाईकोर्ट ने इसी निर्णय को बरकरार रखते हुए आयकर आयुक्त की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब तक पंजीकरण रद्द न किया जाए, तब तक विभाग उसकी प्रामाणिकता पर प्रश्न नहीं उठा सकता।
12AA पंजीकृत संस्थाएं अब इस फैसले से राहत महसूस करेंगी, क्योंकि यह उन्हें बार-बार की जांच और अनावश्यक दखल से सुरक्षा प्रदान करता है। यह निर्णय परोपकारी और शैक्षणिक संगठनों के लिए एक सकारात्मक मिसाल बनेगा।