Chhattisgarh

“रायपुर में कानून बेबस? फर्जी लेटर-पैड से स्कूलों पर कब्ज़ा, कलेक्टर–शासन के आदेश रौंदे गए”

Kotwali Police Raipur – फर्जी लेटर-पैड, जाली सील-मोहर और अवैध नियुक्तियों से स्कूलों में अराजकता — कलेक्टर व शासन के आदेशों की खुली अवहेलना, FIR न होने पर उठे सवालरायपुर। राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान सेंट पॉल चर्च इंग्लिश हायर सेकेंडरी स्कूल सहित अन्य विद्यालयों में फर्जी लेटर-पैड, जाली सील-मोहर और अवैध आदेशों के माध्यम से प्रभारी प्राचार्य एवं शिक्षकों की नियुक्ति/हटाने का गंभीर मामला सामने आया है। यह पूरा प्रकरण अब कानून व्यवस्था, शासकीय आदेशों की अवहेलना और संगठित आपराधिक कृत्यों की ओर इशारा कर रहा है।दस्तावेज़ों के अनुसार, रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा 29/09/2025 को पारित आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि नवीन कार्यकारिणी के गठन तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति, स्थानांतरण अथवा प्रशासनिक निर्णय स्थगित रहेंगे। इसके बावजूद उक्त आदेश को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया। बाद में राज्य शासन द्वारा दिनांक 01/12/2025 को उक्त आदेश को निरस्त (Set Aside) कर दिया गया तथा रायपुर कलेक्टर को प्रशासक नियुक्त कर चुनाव कराने के निर्देश दिए गए।इतना ही नहीं, रायपुर कलेक्टर/प्रशासक द्वारा दिनांक 20/01/2026 को जारी आदेश में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि निलंबित/बर्खास्त कर्मचारियों को पुनः कार्य पर उपस्थित कराया जाए, ताकि शैक्षणिक कार्य बाधित न हो। इसके बावजूद, आरोप है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा कलेक्टर एवं शासन के आदेशों की अवहेलना करते हुए फर्जी लेटर-पैड व जाली सील-मोहर के माध्यम से अवैध नियुक्तियां की गईं, जिससे विद्यालय परिसरों में विवाद, भय का माहौल और शांति भंग की स्थिति बनी।विद्यालय प्रशासन का कहना है कि वैध आदेशों के आधार पर जब अधिकृत प्रभारी प्राचार्य ने कार्यभार ग्रहण करने का प्रयास किया, तब फर्जी आदेशों के सहारे अवैध हस्तक्षेप किया गया, जिससे छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों को गंभीर क्षति पहुँची। यह मामला दस्तावेज़ों की जालसाजी, धोखाधड़ी, शासकीय आदेशों की अवहेलना, अवैध हस्तक्षेप और लोक शांति भंग जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है।प्रश्न यह भी उठ रहा है कि स्पष्ट संज्ञेय अपराध सामने होने के बावजूद अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई, जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के अनुसार ऐसे मामलों में FIR दर्ज करना अनिवार्य है।विद्यालय प्रशासन एवं संबंधित पक्षों ने मांग की है किफर्जी लेटर-पैड, जाली सील-मोहर व आदेशों की तत्काल आपराधिक जांच होदोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएविद्यालय परिसरों में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित की जाएछात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कानून के तहत उदाहरणात्मक कार्रवाई हो।यह प्रकरण केवल एक स्कूल तक सीमित न होकर पूरी शिक्षा व्यवस्था और कानून के शासन पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार कब और कैसी कार्रवाई करते हैं।

Desk idp24

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