रायपुर नगर निगम की सख्त कार्रवाई: अवैध निर्माण पर चला बुलडोज़र, पार्षद को फंसाने की साज़िश का पर्दाफ़ाश

रायपुर।रायपुर शहर में अवैध कब्ज़े और निर्माण के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साफ संदेश दे दिया है कि “कानून से बड़ा कोई नहीं।” आज़ाद गृह निर्माण समिति की शिकायत पर निगम ज़ोन अधिकारियों ने जब मौके पर दस्तक दी तो मामला सच निकला।
स्वीकृत नक्शे से बाहर जाकर गुपचुप तरीके से दीवारें खड़ी की जा रही थीं।
निगम की टीम ने मौके पर ही धारा 293 (1)(ii) एवं 302 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। देखते ही देखते बुलडोज़र की गड़गड़ाहट से पूरा अवैध ढांचा मलबे में तब्दील हो गया।
कार्रवाई के बाद पलटी साज़िश
लेकिन यहां से कहानी ने नया मोड़ लिया।
कार्रवाई से बौखलाए कुछ लोगों ने निगम और पार्षद देवदत्त द्विवेदी को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। जैसे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट में विलेन हीरो को फंसाने की कोशिश करता है, वैसे ही पार्षद पर बेबुनियाद और अनर्गल आरोप लगाए गए।
पार्षद ने सख्त लहजे में कहा
“मैंने हमेशा जनता और कानून के हित में काम किया है। अवैध निर्माण गिराना किसी व्यक्ति से दुश्मनी नहीं, बल्कि नियम का पालन है। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे, निराधार और सोची-समझी साज़िश हैं।”
अवैध रिकॉर्डिंग
यहीं नहीं रुके, आरोप लगाने वालों ने अपनी गलती छुपाने के लिए गुप्त रिकॉर्डिंग का सहारा लिया। बिना अनुमति किसी की बातचीत रिकॉर्ड करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध है। यानी अवैध निर्माण करने वाले अब खुद क्रिमिनल एक्टिविटी में फंसते दिख रहे हैं
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की रिकॉर्डिंग अदालत में न केवल अवैध मानी जाएगी बल्कि सज़ा का भी कारण बन सकती है
निगम की चेतावनी
निगम अधिकारियों ने साफ कहा
“यह शहर कानून से चलता है, किसी की मनमानी से नहीं। जो नियम तोड़ेगा, उस पर बुलडोज़र चलेगा। जो बदनाम करने की साज़िश करेगा, उसका सच जनता के सामने आएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने रायपुर में सनसनी फैला दी है। एक तरफ नगर निगम अपनी “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति पर डटा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग गलती कर खुद को बचाने के लिए पार्षद और निगम को अपराधी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन सच यही है
अवैध कब्ज़ा टूटा, साज़िश बेनकाब हुई, और कानून ने जीत दर्ज की।










