चौकाने वाली खबर : पिछले 15 सालो में लगभग 200 से ज्यादा मजदूरों की जान उद्योगों में हुए हादसों में हो चुकी

रायगढ़। चौकाने वाली खबर यह की पिछले 15 सालो में लगभग 200 से ज्यादा मजदूरों की जान उद्योगों में हुए हादसों में हो चुकी है । यह एक चौकाने वाला आंकड़ा है।औद्योगिक सुरक्षा विभाग चाहे जितने भी कड़ाई से उद्योगों पर नकेल कसे ये लापहवाही कर ही बैठ ते हैं। सोचने वाली बात तो यह है की जिस जिंदल स्टील और पावर कंपनी को लगभग हर साल सुरक्षा के मामले में अवार्ड दिय जाते हैं उसी जिंदल उद्योग के कारखानों में 50 से ज्यादा मजदूरों ने अपनी जान गवा दी है। जब इतने बड़े कंपनी का ये हाल है तो बाकी उद्योगों को मजदूरों के सुरक्षा संबंधी क्या सुविधाएं होती होंगी ये तो सोच में आ ही जाता है। दूसरे नंबर पर m. s .p . स्टील जामगाव का नंबर आता है जहां पिछले 15 सालो में लगभग 16 मजदूरों की मौत हुई है। ये आंकड़े तो रजिस्टर्ड हैं जो प्रशासन के संज्ञान में है कई दुर्घटनाओं की जानकारी तो प्रशासन के पास पहुंच ही नहीं पाती।कई बार ये देखा गया है की कई उद्योगों के कर्मचारी अपने मजदूर को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में एडमिट कर के गायब हो जाते हैं या गुपचुप तरीके से प्राइवेट हॉस्पिटल में घायल मजदूरों का इलाज करवाते हैं। जब तक औद्योगिक सुरक्षा विभाग कड़ाई से सुरक्षा नियमो का पालन उद्योगों में लागू नहीं करेगा तब तक मजदूरों की जान से खिलवाड़ होता रहेगा और उद्योगों में मासूम मजदूरों के मौत के आंकड़े बढ़ते रहेंगे। आईडीपी रायगढ़ की विशेष रिपोर्ट









