एम्स में खुला अत्याधुनिक साइटोजेनेटिक लैब, गर्भ में ही शिशु की बीमारियों का लगाया जा सकेगा पता

रायपुर : रायपुर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गर्भस्थ शिशुओं में जेनेटिक और क्रोमोसोम संबंधी बीमारियों की जांच के लिए अत्याधुनिक साइटोजेनेटिक लैब स्थापित की गई है। इस लैब की मदद से कई प्रकार की जटिल बीमारियों का गर्भ में ही पता लगाकर उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा। इससे शिशुओं की जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
विश्व एनाटॉमी दिवस पर लैब का उद्घाटन करने के बाद डायरेक्टर प्रो. डॉ. नितिन एम. नागरकर ने बताया, लंबे समय से प्रदेश में इस प्रकार की लैब की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब एम्स के एनाटॉमी विभाग में यह लैब स्थापित होने के बाद अभिभावकों को गर्भस्थ शिशु की विभिन्न बीमारियों की जांच के लिए देश के बड़े शहरों तक जाना नहीं पड़ेगा। सारी सुविधाएं अब एम्स रायपुर में ही उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकारी अस्पताल में पहला ऐसा लैब
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. एमआर शेंडे ने बताया, यह प्रदेश के किसी भी शासकीय चिकित्सा संस्थान की पहली साइटोजेनेटिक लैब है। इसकी मदद से जेनेटिक्स और कनजीनेटल बीमारियों में डाउन सिंड्रोम, पटाओ सिंड्रोम, ट्राइसोमी एब्नोर्मिलिटी, रेटीनो ब्लास्टोमी, क्रॉनिक माइलॉयड सिंड्रोम और कई अन्य घातक बीमारियों की जांच संभव हो सकेगी। एनाटॉमी विषय चिकित्सा शिक्षा का आधार विषय है। ऐसे में चिकित्सा छात्रों को भी लैब की मदद से कई नए विषयों की जानकारी मिल सकेगी।
डाटा की मदद से होंगे रिसर्च
एनाटॉमी डॉ. मनीषा बी. सिन्हा का कहना है, लैब की मदद से प्राप्त डाटा का प्रयोग चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में किया जाएगा। इससे प्रदेश की कई जेनेटिक बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां आने वाले वर्षों में सुलभ हो सकेंगी। इसके साथ ही दस साल तक के बच्चों के जेनेटिक डिसआर्डर का पता लगाकर उनका उपचार किया जा सकेगा। लैब के अंतर्गत फिश लैब, पीसीआर और कल्चर लैब स्थापित किया गया है।









