जंग के बीच ट्रंप का बड़ा दावा… ईरान समझौते के करीब, लेकिन तनाव अभी बरकरार

वॉशिंगटन/मिडिल ईस्ट | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Donald Trump ने बड़ा बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब खत्म होने के करीब है और ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। हालांकि जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ईरान पर सख्त रुख, ट्रंप बोले 20 साल लगेंगे संभलने में
एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो ईरान आज परमाणु शक्ति बन चुका होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा हालात में अगर सब कुछ छोड़ भी दिया जाए, तो ईरान को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं। उनके मुताबिक अमेरिका की कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पीछे धकेला है।
इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा, फिर भी उम्मीद जिंदा
पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आयोजित की गई थी, जो करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बताया जा रहा है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance वार्ता से बाहर हो गए।
हालांकि, एक बार फिर नई बातचीत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पाकिस्तान की भूमिका पर ट्रंप मेहरबान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir को फैंटास्टिक बताते हुए उनकी तारीफ की। यह बयान तब आया है, जब इस्लामाबाद में हुई वार्ता असफल रही है।
होर्मुज में अमेरिकी दबाव, नेवी तैनात कर बढ़ाई सख्ती
वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने दबाव बढ़ाने के लिए Strait of Hormuz के आसपास अपनी नौसेना तैनात कर दी है। इस कदम को ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।
तेल बाजार में उथल पुथल, कीमतें 100 डॉलर के पार
इस तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी साफ दिख रहा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में चिंता बढ़ गई है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो कीमतों में गिरावट संभव है।
तनाव और बातचीत के बीच अनिश्चित भविष्य
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर सैन्य दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह तनाव शांति में बदलता है या टकराव और गहराता है।









