फर्जी लेटरहेड, चुनाव टालने की साज़िश और पुलिस संरक्षण के आरोप: CDBE विवाद में बड़ा खुलासा
Fake letterhead, election delay plot, and allegations of police protection: Major revelations in the CDBE controversy

रायपुर।छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) से जुड़ा विवाद अब केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस संरक्षण में कथित रूप से चल रहे एक संगठित खेल की ओर इशारा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, फर्जी दस्तावेज़, झूठी शिकायतें और प्रशासन को गुमराह करने की पूरी श्रृंखला के पीछे एक प्रभावशाली पुलिस अधिकारी की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।
प्रशासक की नियुक्ति के बाद बौखलाहट?
01 दिसंबर 2025 को शासन द्वारा पारित आदेश के बाद CDBE पर रायपुर कलेक्टर को प्रशासक नियुक्त किया गया, जिनका मुख्य दायित्व निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव कराना है।
संस्था से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, कुछ पूर्व पदाधिकारी और उनके सहयोगी जानबूझकर विवाद खड़ा कर प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।
फर्जी सचिव, फर्जी लेटरहेड और झूठी शिकायतें
सूत्रों का आरोप है कि शशि वाघे, अतुल अर्थर, सपना जॉर्ज, मिनका जॉर्ज सहित कुछ अन्य लोग
CDBE के नाम से फर्जी लेटरहेड छपवा रहे हैं, फर्जी सील-मोहर का इस्तेमाल कर रहे हैं,
और स्वयं को “सचिव” दर्शाकर शासन व प्रशासन को शिकायतें भेज रहे हैं।
इन शिकायतों का उद्देश्य कथित तौर पर ईमानदार अधिकारियों को बदनाम करना और चुनाव प्रक्रिया को रोकना बताया जा रहा है।


पुलिस संरक्षण में चल रहा खेल?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरा नेटवर्क कथित तौर पर एक पुलिस इंस्पेक्टर के संरक्षण में काम कर रहा है। सूत्रों का दावा है कि फर्जी दस्तावेज़ों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती,शिकायतों को जानबूझकर एकतरफा दिशा में मोड़ा जाता है,
और स्कूल प्रशासन को कानूनी दांव-पेच सिखाकर दबाव में रखने का प्रयास किया जाता है।
IDP 24 न्यूज़ करेगा बड़ा खुलासा?
सूत्रों के अनुसार IDP 24 न्यूज़ जल्द ही उस कथित भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका,बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को मिले संरक्षण,और फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे नेटवर्क को शासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों के सामने उजागर करने की तैयारी कर रहा है।
स्कूल फीस और 1.5 करोड़ रुपये का सवाल
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि सालेम इंग्लिश स्कूल की लगभग चार महीने की फीस राशि बैंक खाते में जमा नहीं कराई गई,
जिसका अनुमानित आंकड़ा करीब 1.5 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। जैसे-जैसे इस राशि की जांच की आहट तेज हुई, वैसे-वैसे अवैध गतिविधियों और शिकायतों की बाढ़ आ गई।
संस्था का प्रशासन पर भरोसा
छत्तीसगढ़ डायोसिस के वैध पदाधिकारियों ने दो टूक कहा है “हमें शासन, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और रायपुर कलेक्टर पर पूरा भरोसा है। प्रशासक कानून के तहत चुनाव कराएंगे और सच्चाई सामने आएगी। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
अब सबकी नज़र जांच पर
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फर्जी लेटरहेड और सील की जांच कब शुरू होती है,पुलिस संरक्षण के आरोपों पर उच्च स्तर पर क्या कार्रवाई होती है,और क्या चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाएगी।
यदि आरोप सही पाए गए, तो मामला दस्तावेज़ी जालसाजी, धोखाधड़ी, सरकारी कार्य में बाधा और आपराधिक साजिश तक जा सकता है।
यह समाचार सूत्रों, उपलब्ध दस्तावेज़ों और संस्था से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है।
जांच जारी है, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे।
रायपुर सिविल लाइन थाने का असली थाना प्रभारी कौन? जल्द होगा बड़ा खुलासा!”









