प्रशासनिक आदेशों से पर्दाफाश: शशि वाघे–अतुल आर्थर की कथित कहानी तथ्यों के सामने ध्वस्त
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CNI) को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही बयानबाज़ी और कथित दावों पर अब जिला प्रशासन के आधिकारिक आदेशों ने अंतिम विराम लगा दिया है।रायपुर कलेक्टर एवं प्रशासक द्वारा जारी निर्देशों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शशि वाघे और अतुल आर्थर द्वारा प्रस्तुत कथानक का प्रशासनिक रिकॉर्ड में कोई ठोस आधार नहीं है।20 जनवरी 2026 को जारी कलेक्टर–प्रशासक के आदेश में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले सभी विवादों पर सीधा हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए। आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CNI) से संबद्ध विद्यालयों में निलंबित अथवा बर्खास्त कर्मचारियों की उपस्थिति, विद्यालय संचालन, फीस संग्रह और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगी।

इसके क्रम में 23 जनवरी 2026 को डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ (CNI) द्वारा जारी पत्र में कलेक्टर-प्रशासक के आदेशों के तत्काल अनुपालन के निर्देश दिए गए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि 7 अक्टूबर 2025 के बाद किए गए कई दावे और कार्यवाहियाँ वैधानिक मान्यता के दायरे में नहीं आतीं।
प्रमुख बिंदु जो प्रशासनिक आदेशों से स्पष्ट हुए
विद्यालयों में नकद फीस लेने पर पूर्ण प्रतिबंध फीस केवल विद्यालय के बैंक खाते में जमा की जाएगी
CCTV एवं सुरक्षा व्यवस्था तत्काल बहाल करने के निर्देश
शैक्षणिक कार्य में बाधा डालने या आंतरिक विवाद फैलाने पर सख्ती
विद्यालय परिसरों में शांति और अनुशासन बनाए रखने की अनिवार्यता
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जारी आदेशों के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि संस्थागत ढांचे को लेकर फैलाई गई कई कथित कहानियाँ दस्तावेज़ी तथ्यों से मेल नहीं खातीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि व्यक्तिगत दावे और कथानक, जब प्रशासनिक रिकॉर्ड से टकराते हैं, तो उनका अंत तय होता है। डायोसिस और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और पारदर्शिता की दिशा में निर्णायक कदम बताया है।
यह प्रकरण अब यह संदेश देता है कि शिक्षा संस्थानों का संचालन न तो अफवाहों से चलता है और न ही दबाव की राजनीति से बल्कि कानून, दस्तावेज़ और प्रशासनिक आदेश ही अंतिम होते हैं।









