मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल मामला: EOW/ACB के संज्ञान के बाद जांच तेज, कई गंभीर पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग

CDBE का दो टूक संदेश—“किसी को बचाने की कोशिश नहीं, दस्तावेजों से सच सामने आना चाहिए”
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही/रायपुर, 26 सितंबर 2026।
मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल, पेण्ड्रारोड से जुड़े प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी विवाद ने अब गंभीर जांच का रूप ले लिया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB), छत्तीसगढ़ को प्राप्त शिकायत के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही कार्यालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत में उल्लेखित बिंदुओं की नियमानुसार जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर कार्यालय के 11 सितंबर 2026 के पत्र में मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल, पेण्ड्रारोड से संबंधित प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी विवाद सहित कई गंभीर बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रति EOW/ACB तथा शिकायतकर्ता Chhattisgarh Diocese Board of Education (CDBE) को भी भेजी गई है।
अब सिर्फ पत्राचार नहीं, रिकॉर्ड की जांच जरूरी
CDBE ने स्पष्ट किया है कि मामला केवल विद्यालय के आंतरिक विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि शिकायत में वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक निर्णय, विदेशी यात्रा, विदेशी अंशदान अथवा अन्य संस्थागत गतिविधियों से संबंधित सवाल उठाए गए हैं, तो संबंधित बैंक रिकॉर्ड, लेखा अभिलेख, FCRA रिकॉर्ड, अनुमति दस्तावेज, यात्रा विवरण एवं अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

FCRA फंडिंग को लेकर भी उठे गंभीर सवाल
CDBE की ओर से यह भी मांग की गई है कि अतुल आर्थर से संबंधित बताए जा रहे FCRA/विदेशी अंशदान संबंधी वित्तीय पहलुओं की सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वतंत्र रूप से जांच की जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि किसी संस्था या व्यक्ति से संबंधित विदेशी अंशदान प्राप्त हुआ या नहीं, किस खाते में प्राप्त हुआ, उसका वैधानिक उपयोग किस प्रकार हुआ तथा संबंधित रिकॉर्ड में सभी आवश्यक अनुपालनों का पालन हुआ या नहीं।
सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता; लेकिन यदि दस्तावेज मौजूद हैं तो उनकी जांच से पीछे हटने का भी कोई कारण नहीं होना चाहिए।
प्रकाश सहित संबंधित लोगों के कथित संबंधों की भी जांच की मांग
CDBE ने यह भी मांग रखी है कि मुंगेली क्षेत्र में रहने वाले प्रकाश नामक व्यक्ति सहित उन सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित वित्तीय/संस्थागत संबंधों की जांच दस्तावेजों के आधार पर की जाए, जिनका नाम शिकायत अथवा उपलब्ध रिकॉर्ड में सामने आता है।
जांच का आधार व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज, संस्थागत रिकॉर्ड और वैधानिक अभिलेख होने चाहिए।
बिलासपुर क्षेत्र में विदेशी महिला की मृत्यु का पहलू भी जांच के दायरे में आए
CDBE ने यह भी मांग की है कि बिलासपुर क्षेत्र में एक विदेशी महिला की मृत्यु से संबंधित उपलब्ध पुलिस एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की जाए। यदि उक्त घटना का किसी संबंधित व्यक्ति, संस्था, यात्रा, वित्तीय लेन-देन अथवा अन्य गतिविधि से कोई दस्तावेजी संबंध सामने आता है, तो उसकी भी जांच सक्षम एजेंसी द्वारा की जाए।
इस संबंध में CDBE ने किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है और न ही मृत्यु के कारणों के बारे में कोई निष्कर्ष निकाला है। मांग केवल यह है कि उपलब्ध रिकॉर्ड की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो।
“सच सामने आना चाहिए—चाहे किसी के पक्ष में हो या खिलाफ”
CDBE ने तीखे शब्दों में कहा कि जांच किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि तथ्यों को सामने लाने के लिए होनी चाहिए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद वे भी स्पष्ट हो जाएंगे और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
CDBE ने कहा—अब सवाल केवल आरोपों का नहीं, रिकॉर्ड का है। जिस दस्तावेज में जो तथ्य है, वह जांच एजेंसी के सामने आना चाहिए। किसी भी प्रभाव, दबाव या व्यक्तिगत संबंध के आधार पर जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
CDBE जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराएगा दस्तावेज
CDBE ने कहा है कि संस्था जांच में पूरा सहयोग करेगी और उसके पास उपलब्ध संबंधित दस्तावेज, पत्राचार एवं अभिलेख सक्षम अधिकारियों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
CDBE का स्पष्ट रुख है—न किसी को बचाना है, न किसी को फंसाना है; केवल दस्तावेजों और कानून के आधार पर वास्तविकता सामने आनी चाहिए।
