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OTT पर अश्लीलता को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सवाल पर केंद्र सरकार मौन

बिलासपुर। जब से ओटीटी का क्रेज शुरू हुआ है तब से शॉर्ट मूवीस के अलावा ओटीटी पर लगातार अश्लीलता और नशे के विज्ञापन परोसे जा रहे हैं,जिन पर रोक अब तक नहीं लग पाया है।
इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट समेत छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश व देश के और भी हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने तो पिछले साल सुनवाई के दौरान ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए सख्त रुख अख्तियार किया था। वहीं यह मामला लोकसभा में भी उठा था लेकिन कोई नतीजा अब तक निकल कर सामने नहीं आया है।

बता दें बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया था लेकिन सरकार ने अभी जवाब दाखिल नहीं किया है। बता दें कि शहर के समाजसेवी व प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रामावतार अग्रवाल ने वकील अंकित सिंघल के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सोशल मीडिया व ओटीटी पर नशे के विज्ञापनों व अश्लील सामग्री पर प्रतिबंध लगाने हेतु दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है।

वहीं इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अपना पक्ष रखते हुए जवाब में कहा है कि ओटीटी व सोशल मीडिया उनके माध्यम से शासित नहीं होते। उनके द्वारा सिर्फ फिल्म, लघु फिल्म वृत्तचित्र आदि को प्रमाण पत्र दिया जाता है।

हाईकोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय व अन्य को भी नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था लेकिन, प्रकरण में सिर्फ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का ही जवाब मिला है। केंद्र की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए लगातार समय लिया जा रहा है।

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