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पदमुक्त होने के बाद भी दामू अम्बेडरे असंवैधानिक तरीके से कर रहे प्रेस क्लब का संचालन, कलेक्टर कर रहे माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना

रायपुर। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार जिनका उद्देश्य केवल सच दिखाना और लोगों के हक के लिए आवाज उठाना है,भले ही वह सच शासन प्रशासन में बैठे नेता या अधिकारी के खिलाफ क्यों ना हो लेकिन वर्तमान स्थिति में वही पत्रकार अपना उद्देश्य भूलकर पदमोह से घिर चुके हैं।

राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब एक पंजीकृत संस्था है जिसका अपना स्वयं का संविधान है, जिसके प्रावधानों के अनुसार लोकतांत्रिक आदर्शों तथा पारदर्शितापूर्ण चुनावी प्रक्रियाऐं भी निर्धारित हैं। बावजूद इसके इन संवैधानिक नियमों को धता बताकर पद मुक्त होने के बावजूद पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष दामु अंबेडारे और कोषाध्यक्ष शगुफ्ता शिरीन असंवैधानिक रूप से प्रेस क्लब का संचालन कर रहे हैं।

और तो और प्रेस क्लब में इनकी मनमानी इतनी चरम पर है कि किसको प्रेस क्लब का सदस्य बनाना है और किसको नहीं यह भी यह अपनी सुविधा के हिसाब से तय करते हैं,भले ही वह सदस्य प्रेस क्लब के नियम के तहत मान्य हो या ना हो लेकिन प्रेस क्लब के कथित अध्यक्ष दामू अंबेडारे और गुप्ता शिरीन के जी हुजूरी करने वाले जरूर होनी चाहिए।

इतना ही नहीं प्रेस क्लब के अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर दामू अम्बेडरे के तेवर और पावर के क्या कहने सच्चाई के लिए लड़ते तो आज तक इनको नहीं देखा गया लेकिन भ्रष्टाचार में इन्होंने पीएचडी जरूर कर ली है। हाउसिंग बोर्ड आवंटन वाला मामला ही उठाकर देख लीजिए जिसमें उनके परिवार के संबंधियों को इनके प्रेस क्लब में होने का भरकस फायदा हुआ है उन लोगों को मकान आवंटित किया गया है जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई तालुकात नहीं।

गौरतलब है कि विधिक एवं फर्म एंड सोसायटी के नियम – निर्देशों के तहत प्रेस क्लब के चुनाव उपरांत निर्वाचित कार्यकारिणी 1 वर्ष के लिए क्लब संचालन का दायित्व निर्वहन करती हैं । रायपुर प्रेस क्लब की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 2 जून 2019 को समाप्त हो चुका है । उक्त कार्यकारिणी के 6 निर्वाचित पदों में से 4 पदाधिकारियों कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही पदमुक्त हो चुके हैं। नियमतः अध्यक्ष दामू आम्बेडारे एवं कोषाध्यक्ष सुश्री शगुफ्ता शिरीन भी पदमुक्त हो गई हैं। इसके पश्चात भी दोनों पदाधिकारी इस बात को स्वीकार करना छोड़ आज दिनांक तक प्रेस क्लब में पूर्व की भांति अपनी मनमानी करते जा रहे हैं।

वहीं पदाधिकारियों की मनमानी देखते हुए और नए चुनाव के लिए प्रेस क्लब संविधान के अनुसार सम्मानित सदस्यों व्दारा रायपुर प्रेस क्लब के वरिष्ठ व पूर्व पदाधिकारियों – सदस्यों की 11 सदस्यीय एडहॉक कमेटी मनोनित की गयी है। जिनके व्दारा ही माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में प्रेस क्लब के चुनाव के लिए याचिका दायर की गई थी । कमेटी के संयोजक सुकांत राजपूत की याचिका में हाईकोर्ट ने भी शीघ्र से शीघ्र चुनाव का निर्देश दिया था ।

माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा 20 मई 2020 को नए चुनाव जल्द से जल्द करवाने का आदेश दिया गया था । जिसके बाद कलेक्टर ने भी अपर कलेक्टर को 30 दिन के भीतर रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए आदेशित किया था लेकिन आज दिनांक तक रायपुर प्रेस क्लब का विधि सम्मत संचालन नहीं हो रहा है और न ही अब तक प्रेस क्लब के संविधान के अनुसार चुनावी प्रक्रिया संचालित हुई है । इस मामले में आज दिनांक तक कोई भी निर्णय नहीं लिया जाना माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवमानना है। और इसे स्पष्ट तौर पर यह साबित हो रहा है कि अधिकारी वर्ग अब माननीय न्यायालय से भी बड़े हो गए हैं जो माननीय न्यायालय के निर्देशों को अनसुना करते हुए अपनी मनमर्जी करने पर उतारू है।

वहीं इस मामले में कलेक्टर और अपर कलेक्टर की लापरवाही और सुस्त रवैए को देखते हुए एडॉक के सदस्यों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस मामले को संज्ञान में लेने के लिए एक ज्ञापन भी सौंपा है।

अब देखना यह होगा कि माननीय न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले यह अपर कलेक्टर और कलेक्टर मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन करते हैं या उनके भी आदेशों को अनसुना कर अपनी मनमानी करते हैं। और इस महत्वपूर्ण मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कब तक निर्देश जारी करते हैं यह भी देखने वाली बात होगी।

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