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पीसी सिंह और उनके चमचों के खिलाफ FIR दर्ज,बेगुनाह पर जबरदस्ती इस्तीफा देने का दबाव बनाना पड़ा भारी

100 f.i.r. का सेहरा बांधे पीसी सिंह के खिलाफ एफ आई आर के ऊपर एफ आई आर दर्ज हो रहे हैं। इसके बावजूद भी इनके कुछ चापलूस इनकी तारीफों के पुल बांधने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कहीं ऐसा ना हो जाए कि इन चापलूस पर ही पीसी सिंह की हिमाकत करने के चलते एफ आई आर दर्ज हो जाये और इन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़े। क्योंकि पीसी सिंह तो अब तक समाज से लूटे पैसों के बदौलत बचते आए हैं। लेकिन, जब बारी पीसी सिंह के चापलूसों की आएगी तो उन्हें बचाने वाला कोई नहीं होगा, स्वयं पीसी सिंह भी नहीं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसा पीसी सिंह का ही अब तक का प्रमाण पत्र साबित कर रहा है कि वह मुसीबत में अपने साथ खड़े होने वाले लोगों को भी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देते हैं। अपने चमचों की मुसीबत से उनका कोई सरोकार नहीं रहता।

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बहरहाल, हाल ही में पीसी सिंह, अलवान मसीह,ज्यायन्त और विजय नाईक के खिलाफ कोलकाता में एफ आई आर दर्ज हुआ है। कर भला सो हो भला वाली कहावत आप सभी ने सुनी होगी लेकिन पीछे सिंह के साथ इसके उलट कर बुरा तो हो बुरा वाला मामला घटित हुआ। जब उनके द्वारा डिप्टी मॉडरेटर बिशप प्रबल दत्ता पर कोलकाता के स्कूल से फीस देने से मना करने और जमीन बेचने से मना करने पर मुकदमा करने का दबाव बनाते हुए जबरदस्ती उनसे इस्तीफा ले लिया गया। किसी बेगुनाह के साथ नाइंसाफी करने की सजा भी इसी जन्म में मिल जाती है ऐसे में भला पीछे सिंह अपने कर्म फल से कैसे बच सकते हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात तो यह है कि अब तक पीसी सिंह को ऐसी कौन सी शक्ति है जो बचाते आ रही हैम ऐसे गुनहगार को शरण देकर पुलिस प्रशासन भी स्वयं के गुनहगार होने का सबूत पेश कर रही है।

बता दें पी. सी. सिंह ने सुरेश जैकब और पिंटू तिवारी के कहने पर बिशप प्रबल दत्ता पर मुक़दमे करने का दबाव बनाकर उनसे इस्तीफ़ा ले लिया ये कहकर की आपका पी. एफ. और ग्रेजुटी दे देंगे। लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है कि जो सी एन आई का अकाउंट हमेशा मेंटेन रहता था वह अकाउंट पीसी सिंह के मॉडरेटर बनने के बाद इस हद तक खाली हो गया कि ग्रेच्युटी के पैसे देने तक के लिए अकाउंट में बैलेंस नहीं थे। पीसी सिंह के खिलाफ जो अरेस्ट वारंट जारी हुआ है वह उसी चेक के बाउंस होने का है।

इस वारंट से दो बातें साबित होती हैं पहली की क्या सी. एन. आई अकाउंट मे पैसा बचा नहीं, जिस सी. एन. आई मे कारोड़ो रूपए जो 27 डायसिस से आते हैं अस्सेस्मेंट के रूप मे, कारोड़ो रूपए ढेरो विदेशी पार्टनर्स द्वारा भेजे जाते है वह कारोड़ो रूपये. पी. सी सिंह के आने के बाद कहाँ गए?
वही जानकारी के मुताबिक पी. सी. सिंह, सुरेश जैकब और पिंटू तिवारी के कहने पर कारोड़ो रूपए मुक़दमों के नाम पर निकाल कर अपनी जेब भर रहे हैं। पीसी सिंह की चमचागिरी करने वाले बिशपों को गोवा मे बिशप कौंसिल के बहाने ऐश कराने पे खर्च करते हैं ताकी ये बिशप इनके पैरों पर रहे।

विलासिता भरी जिंदगी जीने के चक्कर में सामाजिक उत्थान के पैसों का दुरुपयोग करके ऐसे बिशप और पादरी ना सिर्फ अपने पद की मर्यादा को धूमिल कर रहे हैं बल्कि समाज के लोगों के लिए भी अच्छा संदेश नहीं दे रहे हैं। और ऐसा करने के बाद जो सजा मिलेगी तब ना ही आपको कोई पीसी सिंह बचाने आएगा नाही पिंटू तिवारी क्योंकि जिनके खुद के पैर कबर पर होते हैं वह दूसरों का सहारा कैसे बन सकते हैं। जो पीसी सिंह समाज की आंखों में धूल झोंकते हुए cni को बचाने के नाम पर पैसे लूट रहे तो फिर आखिर पी. सी सिंह के विरुद्ध वारंट कैसे जारी हुआ?

पी. सी सिंह के विरुद्ध 100 से ज़्यादा fir मे कितनो मे FR लगी? पीटर बालदेव के विरुद्ध इसके रहते 10 से ज़्यादा FIR कैसे हुई? यह सोंचने वाली बात है। ऐसे में याब बिशप और पादरीयों को आँखे खोलने की जरूरत है और अपनी समझदारी से CNI को कलीसिया की मदद से ही बचाने की जरूरत है न कि सच उजागर होने के बाद भी पी सी. सिंह, सुरेश जैकब और पिंटू तिवारी जैसे लोंगों से डरने की आवश्यकता है। क्योंकि इनकी तो उलटी गिनती शुरू हों चूकि है।

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