Chhattisgarh

IDP24 न्यूज़ की खबर का असर: आधी रात में छुट्टी की नोटिस, स्कूलों में मचा हड़कंप

Neither the administrator (Deputy Collector)'s permission was taken, nor was the District Education Officer (DEO) informed

रायपुर। IDP24 न्यूज़ पर देर रात प्रकाशित खबर के बाद शिक्षा जगत में खलबली मच गई। सूत्रों के अनुसार, खबर सामने आते ही शशि वाघे गुट से जुड़े लोगों में घबराहट साफ दिखाई देने लगी, और इसी घबराहट में आधी रात को स्कूल में छुट्टी की नोटिस जारी कर दी गई।

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निजी स्कूल समझ कर लिया गया फैसला?

सूत्रों का कहना है कि सपना जॉर्ज और मेनका जॉर्ज रुपाली द्वारा स्कूल को निजी संपत्ति की तरह समझते हुए बिना किसी वैधानिक अनुमति के छुट्टी की नोटिस निकाली गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि

न तो प्रशासक (डिप्टी कलेक्टर) की अनुमति ली गई,

न ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को इसकी जानकारी दी गई।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब पूरा प्रशासनिक नियंत्रण प्रशासक के अधीन है।

सुबह स्कूल पहुंचे बच्चे, अंदर जाने से रोके गए

सुबह जब नन्हे-नन्हे बच्चे स्कूल पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि

“अब दो दिन की छुट्टी है।”माता-पिता में भी इस फैसले को लेकर असमंजस और नाराज़गी देखने को मिली।
सूत्र पूछ रहे हैं क्या बच्चों का भविष्य इतना हल्का मामला है कि आधी रात में नोटिस निकाल दी जाए?

चार महीने की फीस और डर का खेल?

सूत्रों के अनुसार, अब डर यह सता रहा है कि यदि पुलिस द्वारा सपना जॉर्ज और मेनका जॉर्ज से पूछताछ होती है,
तो पिछले चार महीनों की स्कूल फीस राशि से जुड़े कई नाम और खर्चे सामने आ सकते हैं। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं किस्कूल के पैसों से
कोर्ट केस,
अलग-अलग जगह “लीगल खर्च” के नाम पर भुगतान,
और निजी मौज-मस्ती
की गई। जैसे-जैसे इन खर्चों की परतें खुलने की आशंका बढ़ी,
वैसे-वैसे भागदौड़ और भ्रम फैलाने की कोशिशें तेज हो गईं।

ईमानदार प्रशासक को बदनाम करने की नई कोशिश?

सूत्रों का दावा है किअब ईमानदार प्रशासक (डिप्टी कलेक्टर) को बदनाम करने की नई रणनीति रची जा रही है,
ताकि जांच और चुनाव प्रक्रिया को रोका जा सके।
हालांकि, छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन से जुड़े वैध पदाधिकारियों का साफ कहना है कि

“हमारा भरोसा शासन और प्रशासन पर है।
झूठ ज्यादा दिन नहीं चलता, सच सामने आ ही जाता है।”

झूठ का चेहरा आया सामने?
सूत्रों के मुताबिक,
जो लोग लगातार बिशप और मदर संस्था के पदाधिकारियों पर झूठे आरोप लगाते रहे,
अब वही लोग अपने ही फैसलों से सवालों के घेरे में आ गए हैं।
शिक्षा जगत में चर्चा है कि— जिस दिन पूरे लेन-देन और दस्तावेज़ों की जांच शुरू होगी,
उस दिन इस पूरे खेल की असली तस्वीर सामने आ जाएगी।

क्यों बढ़ रहा है डर? सूत्रों ने बताई बड़ी वजह

सूत्रों के अनुसार, शशि वाघे, सपना जॉर्ज, मेनका जॉर्ज और रुपाली में जो घबराहट दिखाई दे रही है, उसकी एक बड़ी वजह सालेम इंग्लिश स्कूल के अधिकृत लेखपाल समीर हिचकेल बताए जा रहे हैं।


कहा जा रहा है कि यदि समीर हिचकेल विधिवत रूप से फीस काउंटर एवं कार्यालय में बैठते हैं, तो पैसे के कथित अनियमित लेन–देन पर तुरंत रोक लग जाएगी और पिछले चार महीनों की फीस से जुड़ी सच्चाई सामने आ सकती है।
शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि फरवरी–मार्च के महीनों में स्कूल में फीस वसूली अपने चरम पर होती है, और इसी अवधि को लेकर सबसे ज्यादा बेचैनी देखी जा रही है।

सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि इस पूरे खेल के पीछे पूर्व प्रभारी प्राचार्य वी. के. सिंह को “मास्टर माइंड” माना जा रहा है, जो कथित तौर पर शशि वाघे–अतुल गुट के साथ मिलकर स्कूल में आर्थिक लाभ कैसे उठाया जाए, इसकी रणनीति तैयार करता रहा है और दूसरों को दिशा देता रहा है। यही कारण बताया जा रहा है कि समीर हिचकेल और कार्यालय स्टाफ के नियमित रूप से स्कूल में बैठने की संभावना से यह समूह डर में है, क्योंकि ऐसा होने पर उनकी मंशा पूरी नहीं हो पाएगी और कथित अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं।

अब सबकी नजर…
अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि—
क्या आधी रात की छुट्टी नोटिस पर कार्रवाई होगी?
चार महीने की फीस का हिसाब कौन देगा?

और क्या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कदम उठेंगे?

IDP24 न्यूज़ का दावा है कि यह मामला यहीं नहीं रुकेगा,
और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे सामने लाए जाएंगे।

यह समाचार सूत्रों, उपलब्ध जानकारी एवं दस्तावेज़ों पर आधारित है।
जांच जारी है, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे।

Desk idp24

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