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सूरज ने अंडर-17 विश्व में जीता ऐतिहासिक स्वर्ण

भारत के ग्रीको रोमन पहलवान सूरज ने अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए 55 किग्रा वर्ग का स्वर्ण हासिल किया। सूरज ने मंगलवार को यूरोपीय चैंपियन अज़रबैजान के फराइम मुस्तफायेव को तकनीकी उत्कृष्टा (11-0) से हराकर भारतीय ध्वज लहराया। सूरज की इस ऐतिहासिक जीत से पहले पप्पू यादव ने 32 साल पहले अंडर-17 चैंपियनशिप 1990 में भारत के लिये स्वर्ण जीता था। यह अंडर-17 विश्व में भारत का तीसरा और सभी विश्व चैंपियनशिप मिलाकर भारत का चौथा स्वर्ण था। यादव ने 1990 में अंडर-17 के अलावा 1992 में अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप भी जीती थी, जबकि विनोद कुमार ने 1980 में भारत को अंडर-17 स्वर्ण दिलाया था।

युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिग ने सूरज के हवाले से कहा, यह मेरा पहला दौरा था। मुझे ग्रिप और स्टांस का बहुत कम अनुभव था। मैंने यह सब एक कैंप में सीखा था। 16 वर्षीय सूरज ने फाइनल में चार-पॉइंट के दो थ्रो के साथ अज़रबैजान के मुस्तफायेव पर अपना वर्चस्व जमाया। सूरज ने आक्रामकता के साथ मुस्तफायेव के खिलाफ एक ओपनिग खोजने की कोशिश की जिसके बाद रेफरी ने पहली अवधि में अजरबैजान पहलवान को निष्कि्रय करार दिया। 1-0 की बढत हासिल कर चुके सूरज ने दूसरी अवधि में पहले निष्कि्रय होने से परहेज किया और फिर अपनी बढèत को 3-0 तक बढ़ाने के लिए टेकडाउन मारा।

वह अभी भी एक मिनट से अधिक समय के साथ निष्कि्रय कहे जाने के खतरे से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने अंडरहुक का इस्तेमाल करके चार अंक जुटाए और 7-0की बढत बना ली। मुस्तफायेव ने लड़ाई में वापसी की कोशिश की लेकिन सूरज ने उसे नियंत्रण के साथ मैट पर फेंक दिया और बाउट और स्वर्ण 11-0 से जीत लिया।

रोनित शर्मा को हालांकि ईरान के अली अहमदी वफा से फाइनल बाउट में हारने के बाद सिल्वर मिला। वह इतिहास रच सकते थे लेकिन ईरानी खिलाड़ी ने 48 किग्रा फाइनल में 3-3 से जीत के साथ उन्हें इससे वंचित कर दिया। दोनों इससे पहले अंडर-17 एशियाई चैंपियनशिप में दो मौकों पर मिले थे, जिसमें अहमदी वफा ने ग्रुप स्टेज बाउट और शर्मा ने फाइनल जीता था।

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