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महाराज कालीचरण के बयान पर कांग्रेस शक के घेरे में! यह चुप्पी क्या दर्शाता है…..

रायपुर। इन दिनों राजनीति में गरमाए मुद्दे में से एक है धर्मसंसद और वहां महात्मा गांधी को लेकर की गई टिप्पणी। बेहद लाजमी है धर्म संसद जैसे बड़े नाम का उपयोग जब यूं ही किया जाने लगेगा तो ऐसी ही अराजकता भरी तस्वीरें और बयान सामने आएंगी। आखिर सरकारी रुपयों से इस तरह धर्म संसद का आयोजन कराने वाली ताकतें कौन सी है, और यह किस ओर इशारा करती है।

धर्म संसद में जिस तरह से छत्तीसगढ़ में आकर महाराज कालीचरण ने महात्मा गांधी को लेकर बयान दिए हैं उनके लिए उठ रहे सवालों से कहीं ज्यादा सवाल अब यह उठने लगा है कि धर्म संसद का आयोजन कराने वाले स्वयं कांग्रेस के नेता सत्ता पर काबिज है जो गांधी जी के पद चिन्हों पर चलने की बातें कहते हैं। ऐसे में ऐसे सत्ताधारी पार्टी द्वारा आयोजित धर्म सभा में आकर उनके आदर्श माने जाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए सहर्ष ही महाराज कालीचरण द्वारा ऐसा बयान दिया जाना यह किसी तरह से भी स्वीकार्य नहीं लग रहा है।

यह बात बिल्कुल हजम होने लायक नहीं है कि आप जिनके घर मेहमान बन कर जा रहे हैं उन्ही को उल्टे गाली देकर आ रहे है। ठीक इसी प्रकार जिस सत्ताधारी पार्टी द्वारा आयोजित धर्म सभा में महाराज कालीचरण सम्मिलित हो रहे हैं आप उन्हीं के पार्टी के आदर्शों पर उंगली उठा रहे हैं। अब यह किसी तरह की साजिश है या फिर राजनीतिक तांडव लेकिन दोनों ही सूरतों में जितने सवाल महाराज कालीचरण के बयान पर नहीं उठ रहे उससे कहीं ज्यादा सवाल छत्तीसगढ़ में काबीज कांग्रेसी नेताओं पर जरूर उठ रहे हैं।

बता दें कि रायपुर में 25 और 26 दिसंबर को आयोजित धर्म सभा में देशभर से कई साधु संत शामिल हुए थे। इस दौरान संत कालीचरण महाराज ने संबोधन करते हुए महात्मा गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आपत्ति दर्ज करवाते हुए संत कालीचरण महाराज के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। धर्म संसद के मंच से कालीचरण महाराज ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को हिंदुस्तान के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा था कि गांधी वंशवाद के पिता थे, मैं उन्हें राष्ट्रपिता नहीं मानता। कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी की हत्या करने के लिए नाथूराम गोडसे को हाथ जोड़कर प्रमाण किया था और उन्हें धन्यवाद दिया था। इसके बाद धर्म संसद में काफी हंगामा शुरू हो गया था।

संत कालीचरण के इस बयान के बाद महंत रामसुंदर दास ने भले ही इस धर्म सभा से खुद को अलग कर लिया हो, लेकिन उनके साथ बैठे कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरों ने इस मामले पर मौन व्रत रख लिया है। छोटी से छोटी बातों पर आवाज उठाने वाले संसदीय सचिव व विधायक विकास उपाध्याय जो स्वयं इस घटना के वक्त वहां मौजूद थे उन्होंने अब तक इतने बड़े बयान पर कोई आपत्ति नहीं जताई और ना ही प्रमोद दुबे का इस मामले को लेकर कोई वक्तव्य सामने आया है।


हालांकि इस बयान को लेकर कांग्रेसी नेता सुबोध जायसवाल ने जरूर अपने ही पार्टी के इन नेताओं पर कटाक्ष किया है उन्होंने ट्वीट कर यहां तक कह दिया कि मैं ऐसे नेताओं को कांग्रेस नहीं मानता जिन्होंने इतने बड़े मुद्दे पर भी सवाल नहीं उठाया। अब उनका सीधा निशाना तो साफ तौर पर नजर आ रहा है कि उनका इशारा विधायक विकास उपाध्याय और प्रमोद दुबे पर है लेकिन उन्होंने इसमें किसी के नाम का जिक्र नहीं किया।

जो भी हो इस धर्म संसद ने कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर से दो गुटों में लाकर खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह कभी नहीं सोचा होगा कि जिस शिव तांडव के प्रसिद्ध गायक संत कालीचरण को वह धर्म संसद में बुलाकर अपनी वाहवाही बटोरने की कोशिश में लगे हैं उन्हीं द्वारा दिया गया एक बयान पूरे कांग्रेस पार्टी में तांडव करवा देगा।

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