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राहुल गांधी के आगमन से ठीक पहले क्यों हटा टी एस बाबा का बैनर, प्रदेश में कांग्रेस की कैसी राजनीति

रायपुर। प्रदेश में दिन-ब-दिन कांग्रेस पार्टी के अनोखे राजनीति की पटल खुलते ही जा रही है। जिसमें पूरे एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए मोहरा केवल एक व्यक्ति को बनाया गया है और वह है “टीएस सिंह देव”। पार्टी के नेताओं को या प्रदेश के मुखिया को टीएस बाबा से क्या दुश्मनी है या ऐसा क्या डर है यह तो पता नहीं लेकिन पार्टी के आलाकमान के सामने टीएस बाबा की छवि खराब करने का भरसक प्रयास जरूर किया जा रहा है।

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पहले टीएस बाबा के ही पार्टी के नेता ने टीएस बाबा पर जान से मारने का आरोप लगाया। उस वक्त प्रदेश में ढाई ढाई साल वाली पारी का मुद्दा गरमाया हुआ था। ऐसे में मुखिया के कठपुतलियों ने टीएस बाबा की छवि धूमिल करने का ऐसा दांव खेला की ढाई ढाई साल वाली पारी का मुद्दा ही सुस्त पड़ गया।

लेकिन अपनी शांत छवि और साधारण व्यक्तित्व के चलते लोकप्रिय हुए टीएस बाबा ने उस वक्त भी अपनी समझदारी का परिचय देते हुए उस मामले को तूल नहीं दिया। लेकिन शायद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके इस साधारण व्यक्तित्व को उनकी कमजोरी समझ ली। और यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी के ही नेताओं ने लगातार टीएस सिंह देव की छवि खराब करने और अपनी दुश्मनी निकालने की मानो कसम ही खा रखी हो।

बता दें कि राहुल गांधी के आगमन से ठीक 4 दिन पहले टीएस बाबा पर जमीन कब्जा करने का आरोप लगाया गया। सरगुजा राजपरिवार पर इस तरह से जमीन कब्जाने का आरोप लगाना वह भी ठीक उस समय जब कांग्रेस के शीर्ष नेता का छत्तीसगढ़ आगमन होना हो साफ तौर पर एक सोची समझी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

इस मामले पर टीएस बाबा ने अप्रत्यक्ष रूप से बृहस्पत सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं उसे इस श्रृंखला के रूप में देख रहा हूं जो किसी से कहलाया गया था कि उनको मुझसे जान का खतरा है। भले इस बार भाजपा पार्षद के कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया हो पर इसके पीछे उनकी अपनी ही पार्टी के नेता शामिल हैं। वहीं इस मामले पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी कहा कि टकराना जरूरी है यह बाबा के समर्थन में कहा गया या नहीं यह बात स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन जब भी टीएस बाबा के ऊपर उनके ही पार्टी द्वारा आरोपों की बौछार की जाती है तब विपक्षी भी बाबा का समर्थन लेते नजर आते हैं।

वही हाल में आज राहुल गांधी का रायपुर आगमन है लेकिन ठीक उसके पहले ही राहुल गांधी के साथ लगे टी एस बाबा के फोटो वाले बैनर को निकाल दिया गया। अपनी पार्टी के ही इतने लोकप्रिय नेता कि इस तरह से बेज्जती वह भी उनके कुछ पार्टी के ही लोगों के साथ यह कई सारे सवालों को जन्म देती है। लेकिन इन सबके बीच में भी भूपेश बघेल की चुप्पी इसके क्या कहने?


लेकिन यह बात स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि आखिर टीएस बाबा ही क्यों! कांग्रेस पार्टी अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेता जिनकी वजह से पूरे देश में छत्तीसगढ़ को जाना जाता है उन पर इस तरह से आक्रमक हो गए हैं। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल अपने हमराही मंत्री के साथ होने वाले इन सब बदसलूकी पर भी मौन धारण क्यों किए हुए हैं? ऐसे में यह भी कवायद लगाई जा रही है कि टीएस बाबा की छवि खराब करने के पीछे मुख्य हाथ भूपेश बघेल का ही है क्योंकि जिस तरह से प्रदेश में राजनीति का गंदा खेल खेला जा रहा है उसमें भूपेश बघेल अपने शीर्ष नेताओं और आलाकमान के सामने अपनी अच्छी छवि का डंका बजाने की कोशिश कर रहे है वह खुली आँखों से नजर आ रही है।


जिस तरह से आज वो राहुल गांधी के सामने एक के बाद एक अपनी योजनाओं का शुभारंभ करवाने वाले हैं इन सभी में एक बात तो स्पष्ट है कि वह राहुल गांधी के सामने यह जताने की कोशिश करने वाले हैं कि वह गांधी परिवार के नक्शे कदम पर चल रहे हैं और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी का उनसे बड़ा हितैषी कोई नहीं।

शायद यही कारण है कि लगातार टीएस बाबा की छवि को खराब कर शीर्ष कमान और जनता के सामने उनके ओहदे को गिराने की कोशिश की जा रही है ताकि आने वाले समय में भी आलाकमान प्रदेश की बागडोर उनके हाथ में सौंपे और टी एस बाबा को सीएम बनने वाली रेस से बाहर कर दें। लेकिन इन सबके बीच एक सम्मानित व्यक्ति टीएस बाबा की छवि को बेदर्दी से उनके पार्टी के लोगों द्वारा ही रौंदा जा रहा है।

लेकिन कहते हैं शांत समंदर में उठने वाली लहर ही अक्सर तबाही का कारण बनती है। तो कहीं ऐसा ना हो जाए कि प्रदेश में जिस तरह से उनके पार्टी के कुछ नेता सीएम बघेल की संरक्षण में उछलते हुए लगातार टीएस बाबा पर प्रहार कर रहे हैं अगर कहीं ऐसा हुआ तो वह कांग्रेस के विनाश का कारण जरूर बनेगा।

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