Chhattisgarh

CG – तालाब से निकली हजारों साल पुरानी मूर्तियां, छिपा हुआ है खजाना, सर्चिंग शुरू

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 जांजगीर चांपा : जिले में बम्हनीडीह विकासखंड के पास लखुरी गांव के तालाब से पुरानी मूर्तियां मिलने की समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय ने विभागीय अधिकारियों को निरीक्षण के लिए मौके पर जाने के निर्देश दिए।

डॉ. पी. सी. पारख उप संचालक और प्रभात कुमार सिंह पुरातत्त्वविद ने लखुरी गांव और पचरिहा तालाब का निरीक्षण किया और पाया कि यह तालाब पहले प्राचीन कुंड हुआ करता था। आज भी तालाब के उत्तर और पूर्व के मेड में लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित सीढ़ियां देखी जा सकती हैं। कुंड के बीचों बीच पाषाण छल्लों से निर्मित लगभग 25 फुट ऊंचा स्तंभ (लाट) तालाब के निकट बरगद पेड़ के नीचे प्राचीन मंदिर के स्थापत्य खंड जैसे वितान, स्तंभ, आमलक के अवशेष पड़े हैं, वहीं पास में नवनिर्मित कालेश्वरी मंदिर के प्रवेश के बाईं ओर उमामहेश्वर, योद्धा, शिव तांडव और अन्य खंडित मूर्तियां रखी हुई हैं। अधिकांश में लोगों ने ऑयल पेंट लगा दिया है जिससे उनका मौलिक स्वरूप लुप्त हो गया है।
इसके बाजू में एक शिव मंदिर है जिसके गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग और नंदी सहित दीवार की आलों में लक्ष्मी नारायण की युगल मूर्ति, सूर्य तथा विष्णु और लक्ष्मी की स्वतंत्र मूर्तियां भी रखीं हैं। ये मूर्तियां कलचुरिकालीन हैं।
इससे लखूरी गांव की प्राचीनता पर प्रकाश पड़ता है। अधिकारियों के पूछने पर ग्रामीणों ने बतलाया कि गांव में एक गढ़पारा है जहां मिट्टी के पुराने बर्तनों के ठीकरे मिलते हैं। मौके पर जाकर देखने से पता लगा की लखुरी गांव में मृत्तिकागढ़ है। छत्तीसगढ़ के गढ़ों की सूची में इसका नाम नहीं है लेकिन मिट्टी के परकोटे और खाई यहां आज भी विद्यमान हैं। स्थल पर ब्लैक ऑन रेड वेयर के टुकड़े भी दिखाई दिए जिससे इसकी प्राचीनता कलचुरी काल से भी अधिक होने की संभावना है। मृत्तिकागढ के कुछ हिस्सों पर कब्जा हो चुका है। इसे अतिक्रमण से सुरक्षित किया जाना आवश्यक है।
तालाब की सफाई में मिली गणेश और योद्धा की लघु प्रतिमाओं को ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पंचनामा की कार्यवाही कर रायपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखने पुरातत्व विभाग को सौंप दिया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय राजस्व निरीक्षक और पटवारी भी मौजूद रहे।

Desk idp24

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