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शहर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सीखी सामुदायिक स्वीकार्यता और जीवन मे ख़ुश रहने की तकनीक

महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद द्वारा महासमुंद शहरी परियोजना की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए समुदाय के बीच  अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने और अपने जीवन में खुश रहने की तरीके इस विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया । आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा की फैमिली काउंसलिंग समुदाय के मध्य जाकर करती है , उसकी बातों की स्वीकार्यता समुदाय में किस प्रकार बने , लोग उनकी बताई बातों का पालन करें इसके लिए वह क्या करें ? इस विषय पर कार्यशाला में चर्चा की गई | इसके लिए ब्रेन हॉट प्रोग्रामिंग तकनीक आवश्यक है |

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की स्वीकार्यता समुदाय में मन से हो इसके लिए उनको हर परिवार के सुख दुख में यथासंभव साथ खड़े होना , समुदाय के परिवारों से अपना एक पारिवारिक संबंध स्थापित करना , आंगनबाड़ी में ECCE गतिविधियां समय बद्ध ढंग से संचालित हो जिससे समुदाय के मध्य कार्यकर्ता की स्वीकार्यता बढ़े ।  साथ ही कार्यकर्ता समुदाय को पोषण एवं स्वास्थ्य के विषयों पर सुशिक्षित करें तो समुदाय में उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी ।

इससे समुदाय को तो लाभ होगा ही साथ ही कार्यकर्ताओं मैं आत्म संतुष्टि की भावना और समुदाय में योगदान करने की भावना विकसित होगी ।लाइफ स्किल ट्रेनिंग के तहत जीवन में खुश कैसे रहें इसके 5 तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया । बच्चा कुपोषित हो ही नहीं , इसके लिए क्या प्रयास करना चाहिए इस संबंध में चर्चा की गई कार्यशाला में प्रशिक्षण सेक्टर पर्यवेक्षक सुश्री आरती कुजूर , सुश्री स्वरूपा भोई एवं सुश्री शीला प्रधान द्वारा दिया गया । प्रशिक्षण सत्र में जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुधाकर बोदले एवं गांधी फेलो आशीष पांडे भी सपोर्टिव सुपरविजन के लिए उपस्थित थे |

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