Chhattisgarh

कलेक्टर को दो टूक- ‘मनमानी बर्दाश्त नहीं’, आदेश का पालन न होने पर जताई भारी नाराजगी

MP High Court On BRTS: बीआरटीएस को हटाने को लेकर लगातार हो रही देरी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि उसके आदेशों को हल्के में लेना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

हाई कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
दरअसल, इंदौर में बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का फैसला करीब 11 महीने पहले लिया जा चुका है, लेकिन जमीनी हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं. शहर की सड़कों पर अब न तो बीआरटीएस पूरी तरह मौजूद है और न ही सामान्य ट्रैफिक के लिए रास्ते सुचारू हो पाए हैं. नतीजा यह है कि शहर में बेतरतीब ट्रैफिक, रोज़ाना जाम और बढ़ते हादसों ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं.

इस मामले की सुनवाई प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ में हुई. कोर्ट ने अफसरों से सीधा सवाल किया कि पिछली सुनवाई 17 दिसंबर को हुई थी, इसके बावजूद अब तक BRTS की दूसरी लेन की रैलिंग और बस स्टॉप क्यों नहीं हटाए गए. कोर्ट ने माना कि यह लापरवाही आम जनता की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है.

जिम्मेदारी तय करना प्रशासन का काम- HC
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि बीआरटीएस की रैलिंग हटाने वाला ठेकेदार काम बीच में छोड़कर भाग गया है. इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मौखिक टिप्पणी की कि प्रशासन कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहा है. न्यायालय ने कहा कि ठेकेदार के भाग जाने को बहाना नहीं बनाया जा सकता और ज़िम्मेदारी तय करना प्रशासन का काम है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले बीआरटीएस की रैलिंग हटाकर वहां स्थायी डिवाइडर बनाए जाएं, ताकि ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू किया जा सके और आम लोगों को राहत मिले. कोर्ट ने यह भी संकेत दिए कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

अगली सुनवाई पर टिकी नजर
गौरतलब है कि इंदौर जैसे व्यस्त शहर में बीआरटीएस के अधूरे हटने से सबसे ज्यादा परेशानी रोज़मर्रा के यात्रियों, स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आपात सेवाओं को हो रही है. अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. सवाल यही है—क्या इस बार आदेशों पर अमल होगा, या फिर इंदौर की ट्रैफिक समस्या यूं ही अदालत की फटकार का इंतज़ार करती रहेगी?

Desk idp24

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!