Chhattisgarh

 हाईकोर्ट बना गरीब आदिवासी का भगवान 

जिले की दो विधानसभा में आदिवासी वर्ग के विधायक जिले में कई आदिवासी समाज के नेता फिर भी एक बेकसूर आदिवासी को रसूखदार ने जेल भिजवा दिया कोतवाली थाना की कार्यवाही भी संदेह के घेरे में। मामले में हाईकोर्ट बना गरीब आदिवासी का भगवान आदिवासियों की हितैषी सरकार कही जाने वाली कांग्रेस सरकार के राज में एक बेकसूर आदिवासी गरीब को मेहता पेट्रोल पंप के संचालक अजीत मेहता ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए जेल भिजवा दिया ।

यहां स्थानीय सिटी कोतवाली पुलिस ने भी आनन फानन में केस दर्ज कर बिना जांच के कार्यवाही कर दी । ये अन्याय कॉग्रेस के राज में हो रहा है। अजीत मेहता ने कोतवाली में ये शिकायत दर्ज करवाई थी की जगतपुर पटवारी हल्का नंबर 48 के खसरा नंबर 5/2 12/3ख रकबा 0.3440 हे, खसरा नंबर 5/3 रकबा 1.0960 है, और खसरा नंबर 8 रकबा 0.0570 हे, की भूमि को साल 2019 में वसीयत कर के पिलाराम निवासी गढ़ उमरिया से भूमिस्वामी हक प्राप्त किया था।

अजीत मेहता ने शिकायत की थी की लीज और वसीयत के विरुद्ध पिलाराम के पुत्र मकसीरो और दोनो पुत्री देवमति और उरकुली ने ऋण पुस्तिका गुम होने का फर्जी आवेदन दे कर दूसरी किसान किताब जारी करवाई थी। इस शिकायत पर सिटी कोतवाली टी आई ने मकसिरो को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था। जबकि राजस्व विभाग के इस मामले में तहसीलदार एसडीएम ने अजीत मेहता के इस आवेदन को खारिज कर दिया था।

जिस गरीब आदिवासी मकसीरों का भूमि पर हक था वो जेल की हवा खा रहा था। रायगढ़ तहसीलदार ने 6 जून को 2022 को आदेश दिया था की वादग्रस्त भूमि की ऋण पुस्तिका अजीत मेहता के नाम पर है इसलिए मकसीरो को दूसरी ऋण पुस्तिका दी जाय इस मामले में एडवोकेट हरी अग्रवाल ने आदिवासी मकसीरो के तरफ से हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस राकेश मोहन पांडे की डबल बेंच ने बिना बेल एप्लीकेशन लिए सीधे आदिवासी को रिहा करने का आदेश जारी किया।

यहां कोतवाली पुलिस की कार्यवाही भी संदेह के घेरे में है गरीब आदिवासियो की भूमि को रसूखदार किस तरह से छल कपट कर के कब्जा करते हैं ये घटना इसका ताजा उदाहरण है।अब इस मामले में देखना ये है की समाज के व्यक्ति के ऊपर हुए इस अत्याचार के खिलाफ आदिवासी समाज क्या रुख अपनाता है।

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