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चुनाव हारने के पीछे यह बड़ा कारण,अगर ऐसे ही हाल रहा तो 2023 के चुनाव में भी औंधे मुंह गिर सकती है बीजेपी

रायपुर। किसी भी पार्टी की जीत उनके कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए मेहनत पर निर्भर करती है। कौन सी पार्टी किस हद तक जनता को अपने वादों और अपने कार्यों के माध्यम से लुभा सकती है पार्टी के नेताओं के साथ साथ उनके कार्यकर्ताओं के सुदूरवर्ती सोंच और दिमाग पर निर्भर करता है। लेकिन कई बार एक गलती और सारी मेहनत विफल हो जाती है। प्रदेश में इन दिनों भाजपा का हाल भी कुछ ऐसा ही है। जहां पार्टी को जीवित रखने से कहीं ज्यादा पार्टी के बड़े पदाधिकारी अपने और अपने परिवार जनों को ही पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर पद स्थापित करने की होड़ में लगे हुए हैं, बजाय उनके जिन कार्यकर्ताओं ने सालों से पार्टी के लिए मेहनत कर उसे जीवंत रखने में अपना 100% योगदान दिया है। भाजपा के पदाधिकारियों के इसी रवैया के चलते भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी भरी है।

जिसका एक नतीजा 2018 विधानसभा चुनाव में देखने को मिला तो आज भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने और सुनने को मिल रहा है जहां पर कार्यकर्ताओं में भाजपा के बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ नाराजगी खासा नाराजगी है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया लेकिन जब बारी आती है किसी बड़े पद पर नियुक्ति की तो पदाधिकारी अपने सगे संबंधियों को उन पदों पर नियुक्त कर देते हैं। ऐसे में हमारे मेहनत का फल किसी और के लिए सर का ताज बन जाता है और हम मजदूर की तरह केवल पार्टी को जीवित रखने का ही कार्य करते रहते हैं।


भाजपा में उठे इस मनमुटाव का असर आगे 2023 चुनाव के लिए भी भाजपा के लिए कलंक साबित हो सकता है। जनता भी नए चेहरे नई सोंच को स्वीकार करने की मंशा लिए बैठी है। लेकिन बार-बार एक ही चेहरे को जनता के सामने परोस कर पार्टी अपने पैर में कुल्हाड़ी मार रही है। भाजपा के पास ऐसे कद्दावर कार्यकर्ता हैं जिनके काम को और जिन्हें व्यक्तिगत रूप से भी जनता पसंद करती है अगर उन्हें मौका दिया जाता है तो हो सकता है कि 2023 की जीत भाजपा की झोली में आ जाये। वरना भाजपा के वर्तमान में जो अंदरूनी हालात है ऐसे में कई ने फिर से उन्हें हार का स्वाद ना चखना पड़े।

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