Baglamukhi Jayanti 2026: जानिए सही तारीख, पूजा का महत्व और मनोकामना पूर्ण करने की आसान विधि

Baglamukhi Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व बताया गया है, जिनमें मां बगलामुखी को आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी जयंती मनाई जाती है, जिसे साधना और सिद्धि का अत्यंत प्रभावशाली दिन माना जाता है।साल 2026 में मां बगलामुखी जयंती 25 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
मां बगलामुखी का स्वरूप और शक्ति, क्यों कहा जाता है इन्हें पीताम्बरा
मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीले रंग से विशेष लगाव है। इनके अन्य नाम बगला, वलगामुखी और ब्रह्मास्त्र विद्या भी प्रचलित हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी वाणी, बुद्धि और नियंत्रण शक्ति की देवी हैं। इन्हें शत्रु दमन और वाक शक्ति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। तांत्रिक साधना में भी इनकी पूजा का विशेष स्थान है।
पूजा का सही तरीका, कैसे करें मां को प्रसन्न
मां बगलामुखी की पूजा विशेष विधि से की जाती है। सामान्य गृहस्थ भक्त भी सरल तरीके से उनकी आराधना कर सकते हैं।
पूजा के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- सुबह स्नान कर पीले रंग के वस्त्र धारण करें
- पूजा में पीले फूल, हल्दी, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें
- माता को केला या हलवे का भोग लगाएं
- ‘ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः’ मंत्र का श्रद्धा से जाप करें
- अंत में आरती कर अपनी मनोकामना व्यक्त करें
ध्यान रखें कि तांत्रिक साधना हमेशा किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
भैरव पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है साधना
मां बगलामुखी की पूजा से पहले मृत्युंजय भैरव की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे साधना और भी प्रभावी होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति जल्दी होती है।
मां बगलामुखी की पूजा से क्या मिलते हैं लाभ
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है
- कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है
- वाद-विवाद में जीत हासिल होती है
- वाणी में प्रभाव और आत्मविश्वास बढ़ता है
- जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
- आर्थिक परेशानियां कम होती हैं
भारत में कहां स्थित हैं मां बगलामुखी के प्रसिद्ध सिद्धपीठ
देश में मां बगलामुखी के तीन प्रमुख सिद्धपीठ माने जाते हैं:
- बगलामुखी मंदिर बनखंडी
- बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा
- बगलामुखी मंदिर दतिया
इन मंदिरों में विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
भक्ति और श्रद्धा से करें पूजा, जीवन में आएगा सकारात्मक बदलाव
मां बगलामुखी जयंती का दिन साधना, शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। सच्चे मन और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को दूर कर सफलता के रास्ते खोल सकती है।









