बस्तर में नक्सलवाद का आखिरी दौर, 96 फीसदी इलाका हुआ मुक्त

बस्तर : संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा से पहले ही क्षेत्र में बड़े बदलाव दिखाई देने लगे हैं। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और बढ़ते आत्मसमर्पण के चलते अब संभाग का लगभग 96 फीसदी हिस्सा नक्सलमुक्त हो चुका है।
1000 गांवों में खत्म हुआ नक्सली असर
रिपोर्ट के अनुसार दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा समेत सात जिलों के करीब 1000 गांवों में अब नक्सली गतिविधियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इन इलाकों में पिछले एक साल में किसी बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली है, जो सुरक्षा व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।
नक्सलमुक्त गांवों को मिलेगा एक करोड़
राज्य सरकार ने नक्सलमुक्त घोषित गांवों के विकास के लिए विशेष योजना लागू की है। ऐसे प्रत्येक गांव को बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से विकास को बढ़ावा मिलेगा।
दंतेवाड़ा से हटाया गया पुलिस कैंप
दंतेवाड़ा के कटेकल्याण क्षेत्र में स्थित जारम पुलिस कैंप को हटा लिया गया है। यह इलाका पहले नक्सलियों के प्रभाव में था और अबूझमाड़ तक रसद पहुंचाने का मुख्य मार्ग माना जाता था।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, इन कैंपों की जगह अब आदिवासी क्षेत्रों में सुविधा केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
लगातार बढ़ रहा आत्मसमर्पण
साल 2024 से अब तक करीब 2600 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कई बड़े नक्सली नेता भी मारे गए या मुख्यधारा में लौट आए हैं, जिससे संगठन की ताकत कमजोर हुई है।
सीमावर्ती इलाकों में तेज हुई कार्रवाई
सुरक्षाबल तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से लगते सीमावर्ती क्षेत्रों में भी अभियान तेज कर रहे हैं, ताकि नक्सलियों की आवाजाही और नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
निर्णायक चरण में पहुंचा अभियान
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहा अभियान अब अपने अंतिम चरण में है। जिस तेजी से हालात बदल रहे हैं, उससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पूरा क्षेत्र नक्सलमुक्त घोषित किया जा सकता है।









