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मीडिया कवरेज से छुटे पीसी सिंह के पसीने, डर के कारण पहले ही ले ली जमानत

कोलकाता। अक्सर हम सब ने सुना है कि गुनाहगार अपनी गलती छुपाने के लिए बार बार गलती करता है और यह गलती उससे उसका डर करवाता है। मतलब यह तो स्पष्ट है कि, डरता केवल वही है जिसने कोई जुर्म किया हो। और कुछ ऐसा ही डर देखने को मिला पीसी सिंह के चेहरे पर, जो भले ही अपने पैसों के दम और दाऊद के दम पर अब तक 100 f.i.r. होने के बाद भी स्वतंत्र घूम रहा है। लेकिन सच का सामना करने की हिम्मत उसमें आज भी नहीं है। ऐसा हम नहीं बल्कि उसके कारनामे ने खुद ही साबित कर दिया है कि, भले ही पिसी सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने साथियों के साथ मिलकर सच के लिए आवाज उठाने वाले प्रबल दत्ता को उनके हक से बेदखल कर दिया। लेकिन जब बारी आई इसके बारे में मीडिया को जानकारी देने की तो उन्होंने डर की वजह से पहले ही अपनी जमानत ले ली।
दरअसल सीएनआई के बिशप रह चुके प्रबल दत्ता को पीसी सिंह और उनके साथियों ने मिलकर उनके पद से हटा दिया। इसके पीछे का कारण सिर्फ इतना था कि प्रबल दत्ता ने पीसी सिंह की हां में हां नहीं मिलाई और उनके गलत कामों में साथ देने से मना कर दिया। लेकिन दूसरों का हक मारकर कमाए हुए पैसों पर पलने वाले और उन पैसों पर अय्याशी करने वाले पीसी सिंह और उनके साथियों को यह बात रास नहीं आई। जिसके कारण उन्होंने प्रबल दत्ता से उनका पद छीन लिया और उन्हें उनकी ग्रेच्युटी की राशि भी नहीं दी।

मॉडरेटर के इस तानाशाही रवैये से हताश होकर प्रबल दत्ता ने माननीय कोलकाता न्यायालय का शरण लिया और ग्रेच्युटी चेक के अनादरित करने के मामले में अपनी शिकायत दर्ज करवाई। जिसके लिए बीते 11 मार्च 2022 को प्रतिवादियों के उपस्थिति के लिए समन जारी किया गया था। लेकिन मॉडरेटर पीसी सिंह ने अपने साथियों डिप्टी मॉडरेटर, तत्कालीन जनरल सेक्रेटरी और तत्कालीन कोषाध्यक्ष के साथ मिलकर मीडिया का सामना करने के डर से 1 दिन पहले ही माननीय कोलकाता न्यायालय में जाकर जमानत ले ली।
अब यहां पर सवाल यह उठता है मॉडरेटर और उनके साथी अगर सही थे तो उनको आखिर क्यों मीडिया से मुह छिपाने व डरने की आवश्यकता पड़ी?
बहरहाल कोर्ट ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए CNI की संपत्तियों पर ताला और कब्जा का आदेश जारी कर दिया है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 10 मई 2022 को होगी।

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