Chhattisgarh

मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र का राज परिवार के सदस्य समेत हजारों भक्तों ने किया स्वागत

जगदलपुर : दंतेवाड़ा से आई मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र का राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव समेत हजारों भक्तों ने स्वागत किया। 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की सबसे महत्वपूर्ण मावली परघाव की रस्म मंगलवार देर रात पूरी की गई।

माता के स्वागत के लिए सड़कों को फूल से बिछाए गए। जमकर आतिशबाजी भी की गई। देर रात तक मावली परघाव रस्म की अदायगी चली। पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। हजारों भक्तों ने माता दंतेश्वरी और माता मावली का दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव ने बताया कि, बस्तर में अब तक जितने भी राजा थे सभी इस रस्म की अदायगी के समय कांटाबंद (राजा के सिर में फूलों का ताज) पहनकर ही माता की आराधना करने आते थे हैं। मैं भी इसी परंपरा को निभा रहा हूं। यह कांटाबंद का फूल बस्तर के जंगल में मिलता है।

इसकी अपनी एक अलग विशेषता है। उन्होंने कहा कि, इसे पहनकर मां दंतेश्वरी और मां मावली के छत्र और डोली को साष्टांग प्रणाम कर डोली को कंधे में उठाकर राज महल लाया हूं। माता बस्तर दशहरे में शामिल होंगी। जब तक माता की विदाई नहीं होती, तब तक माता राजमहल प्रांगण में ही रहेंगी। उन्होंने कहा कि, माता हमारी ईष्ट देवी हैं। बस्तर दशहरे में शामिल होने सदियों से आ रहीं हैं।

दंतेवाड़ा पहुंच दिए थे निमंत्रण

दरअसल, सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव इस बार भी शारदीय नवरात्रि के पंचमी के दिन दंतेवाड़ा पहुंचे थे। उन्होंने आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को मंगल पत्रक भेंट कर बस्तर दशहरा में शामिल होने निमंत्रण दिया था।

जिसके बाद अष्टमी के दिन माता की डोली और छत्र को जगदलपुर के लिए रवाना किया गया था। अष्टमी की देर रात छत्र और डोली जगदलपुर पहुंचीं। जिसके बाद नवमीं के दिन परंपरा के अनुसार बस्तर के राजा कमलचंद भंजदेव माता का स्वागत करने के लिए पहुंचे।

जगदलपुर के जिया डेरा से दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी, सेवादार, जिला प्रशासन की टीम माता की डोली और छत्र को जगदलपुर के माता दंतेश्वरी के मंदिर लेकर गए।

जहां बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव समेत जगदलपुर जिला प्रशासन की टीम ने मावली परघाव की रस्म अदा की। जिन-जिन जगहों से माता की डोली और छत्र को नगर परिक्रमा करवाया गया था, वहां सड़कों पर फूल बिछाए गए थे। जमकर आतिशबाजी भी की गई।

जोगी उठाई रस्म हुई पूरी

मंगलवार की शाम जगदलपुर के सिरहासार भवन में जोगी उठाई की रस्म भी पूरी की गई। जोगी 9 दिनों से उपवास रहकर एक कुंड में बैठ माता की आराधना और तपस्या किए। नवमीं को जोगी को उठाकर माता के स्वागत के लिए लाया गया। बस्तर दशहरा में यह रस्म बेहद महत्वपूर्ण होती है। नवरात्र के पहले दिन ही जोगी तपस्या करने के लिए बैठते हैं। जिन्हें नवमीं के दिन पूरे विधि-विधान से उठाया जाता है।

Desk idp24

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